तेहरान यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर फुआद इज़ादी ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को लेकर गंभीर बातें कही हैं। उन्होंने इस युद्ध को पूरी तरह से गैर-ज़रूरी बताया और कहा कि ईरान अमेरिका के लिए कभी भी खतरा नहीं रहा है। प्रोफेसर के अनुसार बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकाला जा सकता था लेकिन हमलों को जारी रखा गया। इस संघर्ष को अब चौथा हफ्ता शुरू हो गया है।

ईरानी प्रोफेसर ने हमलों और नागरिक मौतों पर क्या दावे किए हैं?

प्रोफेसर इज़ादी ने जानकारी दी कि अब तक 2,000 से ज्यादा ईरानी आम नागरिक इन हमलों में मारे गए हैं। उन्होंने बताया कि युद्ध के पहले ही दिन अमेरिकी मिसाइल हमले में एक स्कूल की 165 छात्राओं की जान चली गई। प्रोफेसर के अनुसार ईरान ने शुरुआत में केवल उन अमेरिकी ठिकानों को ही निशाना बनाया था जहाँ से ईरान के खिलाफ ऑपरेशन चल रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने तेल सुविधाओं पर हमला तब तक नहीं किया जब तक उनकी अपनी South Pars फैसिलिटी को निशाना नहीं बनाया गया।

मुख्य बिंदु विवरण और आंकड़े
कुल नागरिक मौतें 2,000 से अधिक
छात्राओं की मौत 165 (स्कूल पर हमले के दौरान)
निशाना बने स्थान अस्पताल, घर, स्टेडियम और टीवी स्टेशन
तेल पाबंदी में ढील 19 अप्रैल 2026 तक

युद्ध के पीछे की वजह और मौजूदा हालात क्या हैं?

प्रोफेसर ने पूर्व अमेरिकी अधिकारी Joe Kent का जिक्र करते हुए कहा कि इजरायली दबाव की वजह से वॉशिंगटन ने जंग के मैदान में ऐसे फैसले लिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार बातचीत के दौरान ही अमेरिका और इजरायल की तरफ से हमले किए गए। वर्तमान स्थिति यह है कि IRGC ने अपने 70वें दौर के जवाबी हमलों की घोषणा की है जिसमें 5 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही गई है। इसी बीच ग्लोबल मार्केट को स्थिर रखने के लिए अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री पर लगी पाबंदियों में 19 अप्रैल 2026 तक थोड़ी ढील दी है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.