UAE और सऊदी अरब में हुए ड्रोन हमलों के बाद अब इराक की तरफ से बड़ा बयान आया है। इराक सरकार ने साफ कर दिया है कि उनकी जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश पर हमला करने के लिए नहीं किया गया। इस मामले को लेकर इराक के प्रधानमंत्री ने एक हाई लेवल मीटिंग की है ताकि इस तनाव को कम किया जा सके।
इराक की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मीटिंग में क्या हुआ?
20 मई 2026 को इराक के प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की पहली बैठक की अध्यक्षता की। इस मीटिंग में उन्होंने सऊदी अरब और UAE पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की। प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि इराक की जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी या मित्र देश के खिलाफ हमले के लिए नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने आदेश दिया है कि जो भी व्यक्ति या ग्रुप इस तरह की साजिश में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
UAE और सऊदी अरब ने क्या आरोप लगाए हैं?
UAE के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को कायराना बताया है और दावा किया है कि ये ड्रोन हमले इराक की जमीन से किए गए। UAE ने बगदाद से मांग की है कि वे अपनी जमीन से होने वाले सभी दुश्मन हमलों को बिना किसी शर्त के तुरंत रोकें। दूसरी तरफ, सऊदी रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि उन्होंने इराक के हवाई क्षेत्र से आने वाले कम से कम 3 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। अबू धाबी के Barakah Nuclear Power Plant पर भी ड्रोन हमला हुआ था, जिसकी पुष्टि UAE के रक्षा मंत्रालय ने की है।
अब आगे क्या होगा और जांच कैसे होगी?
इराक सरकार ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए एक स्पेशल कमेटी बना दी है। सेना के प्रवक्ता Sabah al-Numan ने बताया कि यह कमेटी UAE और सऊदी अरब के अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर काम करेगी। इराक सरकार का कहना है कि वह किसी भी ऐसी ताकत को बर्दाश्त नहीं करेगी जो इराक या उसके पड़ोसी देशों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इराक सरकार ने हमलों पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने हमलों की निंदा की और कहा कि इराक की जमीन का इस्तेमाल किसी भी हमले के लिए नहीं हुआ। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
UAE ने इराक से क्या मांग की है?
UAE ने इराक से मांग की है कि वे अपनी जमीन से होने वाले सभी दुश्मन हमलों को बिना किसी शर्त के तुरंत रोकें क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
