इराक और कुवैत के बीच समुद्री सीमा को लेकर विवाद गहरा गया है। इराक ने कुवैत पर अपनी समुद्री सीमा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत और विरोध जारी है।

इराक ने लगाया सीमा उल्लंघन का आरोप

25 जून 2026 को इराक ने आधिकारिक तौर पर कुवैत पर अपनी दक्षिणी समुद्री सीमा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। इराक ने इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव और सुरक्षा परिषद को संदेश भेजे हैं। इराक के विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह विवाद Khor Abdullah सीमा बिंदु पर कुवैत द्वारा पोर्ट बनाने की वजह से हुआ है, जहाँ इराक का मानना है कि कुवैत उसके इलाके में घुसपैठ कर रहा है।

GCC और अमेरिका का रुख

मनामा में अमेरिका और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) की बैठक के दौरान GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने कुवैत के विदेश मंत्री Shaikh Jarrah Jaber Al Ahmad Al Sabah से मुलाकात की। इस बैठक के बाद एक साझा बयान जारी किया गया जिसमें कुवैत की संप्रभुता और उसकी सीमाओं का सम्मान करने की बात कही गई। बयान में कहा गया कि कुवैत के क्षेत्रीय जल पर उसका पूरा अधिकार है और इराक को अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए।

राजनयिक स्तर पर बातचीत

तनाव के बीच राजनयिक स्तर पर भी मुलाकातें हुई हैं। 21 जून 2026 को GCC महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने रियाद में इराक की राजदूत Ms. Safia Taleb Al Souhail से मुलाकात की।

विवाद की मुख्य वजहें

  • UN Resolution 833: 1993 के इस प्रस्ताव ने जमीन की सीमा तो तय कर दी थी, लेकिन समुद्री सीमा को दोनों देशों पर छोड़ दिया था।
  • अदालती फैसला: सितंबर 2023 में इराक की फेडरल सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के एक समुद्री समझौते को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था।
  • नए मैप्स का विवाद: इराक ने 2026 की शुरुआत में UN को नए समुद्री मैप और कोऑर्डिनेट्स भेजे थे। कुवैत और GCC देशों का कहना है कि ये मैप कुवैत की संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं।

कुवैत और GCC देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और UNCLOS के नियमों का पालन करने पर जोर दिया है और इराक के नए दावों का कड़ा विरोध किया है।