इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी (Mohammed Shia al-Sudani) ने देश के सैन्य क्षेत्रों पर हुए हमलों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने विदेश मंत्रालय को सख्त निर्देश दिए हैं कि बगदाद में मौजूद अमेरिकी दूतावास के प्रभारी (Charge d’affaires) को तुरंत तलब किया जाए। यह फैसला इराक के सैन्य ठिकानों पर हाल ही में हुई बमबारी और सुरक्षा स्थिति को देखते हुए लिया गया है।
इन हमलों में क्या हुआ और सरकार ने क्या कदम उठाए?
- अनबार (Anbar) में PMF ठिकानों पर हुए हमलों में कमांडर साद दवाई अल-बैजी समेत 15 लोगों की जान गई।
- इरबिल (Erbil) में पेशमर्गा बेस पर ईरानी मिसाइलें गिरीं, जिसमें 6 लोग मारे गए और 30 से ज्यादा लोग घायल हुए।
- प्रधानमंत्री ने अमेरिकी प्रभारी जोशुआ हैरिस (Joshua Harris) और ईरानी राजदूत मोहम्मद काज़म अल सादेक को जवाब देने के लिए बुलाया है।
- इराकी सरकार ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन और सैन्य क्षेत्रों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई बताया है।
आम जनता और सुरक्षा पर इसका क्या असर होगा?
इराक की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बैठक की है। इस बैठक में तय किया गया कि बाहरी देशों द्वारा इराक की जमीन पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन हमलों का विरोध दर्ज कराएगी। अधिकारियों का कहना है कि सैन्य क्षेत्रों पर हमले से स्थानीय नागरिकों और सुरक्षा बलों के बीच डर का माहौल पैदा होता है, जिसे रोकने के लिए कूटनीतिक रास्ते अपनाए जा रहे हैं।
इराक के विदेश मंत्रालय ने रॉयटर्स (Reuters) को बताया कि वे प्रधानमंत्री के आदेश का पालन करते हुए जल्द ही दोनों देशों के प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक बैठक करेंगे। फिलहाल इराक के सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
