Iraq Oil Export: इराक ने ईरान से मांगी तेल निर्यात के लिए विशेष छूट, होर्मुज जलडममध्य में तनाव के बीच बड़ा कदम।

हार्मूज जलडमरूमध्य में लगातार बढ़ते तनाव के बीच इराक ने ईरान से अपने तेल निर्यात को लेकर एक बड़ी मांग रखी है। 19 अगस्त 2026 को इराकी संसद के स्पीकर Haibat al-Halbousi ने बगदाद में अपने ईरानी समकक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf से मुलाकात की और औपचारिक रूप से अनुरोध किया कि इराक को तेल जहाजों की आवाजाही के लिए विशेष छूट दी जाए।
क्षेत्रीय तनाव और आर्थिक चिंताएं
इराकी संसद के स्पीकर ने इस मुलाकात के दौरान साफ कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों की वजह से इराक की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने ईरान से अपील की कि दोनों देशों के आपसी संबंधों को इस तरह से आगे बढ़ाया जाए जिससे इराक के आर्थिक हितों की रक्षा हो सके। ऊर्जा निर्यात की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से तेल भेजना अब काफी जोखिम भरा हो गया है।
इस मुलाकात के जवाब में ईरानी नेता Mohammad Bagher Ghalibaf ने इराक के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग को और अधिक बढ़ाने की अपनी इच्छा जताई। उन्होंने पुराने द्विपक्षीय समझौतों को पूरी तरह से लागू करने का भरोसा भी दिया। स्पीकर के साथ बैठक के बाद ईरानी अधिकारी ने इराक के राष्ट्रपति Abdul Latif Rashid से भी मुलाकात की, जिसमें आपसी रिश्तों को मजबूत करने और क्षेत्र के हालातों पर चर्चा की गई। हालांकि, तेहरान की तरफ से इराक को तेल शिपमेंट के मामले में किसी भी तरह की विशेष छूट दिए जाने को लेकर कोई पक्की जानकारी सामने नहीं आई है।
इराक का वैकल्पिक योजना पर जोर
यह कूटनीतिक बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब पूरे मध्य पूर्व में भारी अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। इससे ठीक पहले 18 अगस्त 2026 को इराकी कैबिनेट ने अपनी तरफ से एक वैकल्पिक योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत देश के कच्चे तेल का निर्यात विशेष अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय कंपनियों के जरिए कई दूसरे रास्तों से किया जाएगा। ये नए अनुबंध 1 सितंबर से शुरू होने वाले हैं और शुरुआती तौर पर अगले तीन महीनों के लिए लागू रहेंगे।
दूसरी तरफ, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज की मौजूदा स्थिति को लेकर अमेरिका और ईरान के बयानों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने मंगलवार को बयान देते हुए कहा कि जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला हुआ है, जबकि ईरान का दावा है कि यह रास्ता अभी भी बंद है। इस विरोधाभास के कारण जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही बहुत धीमी हो गई है क्योंकि कई जहाज मालिकों को सही संकेत नहीं मिलने की वजह से इस रूट से गुजरने में डर लग रहा है।
यह तनाव उस समय और बढ़ गया जब सोमवार को एक अस्थाई संघर्षविराम की मियाद खत्म हो गई। इसके तुरंत बाद एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने संकेत दिया कि देश अब पूरी तरह से आक्रामक सैन्य रुख अपनाने की ओर बढ़ रहा है। सुरक्षा के इन्हीं हालातों के मद्देनजर चीन की कुछ बड़ी शिपिंग कंपनियों ने भी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य से अपने तेल टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी है।