इराक का बड़ा फैसला, 30 सितंबर तक सभी मिलिशिया हथियार सरकार को सौंपने का दिया कड़ा अल्टीमेटम.

Praggya Singh sabal24 August 20263 min read62 viewsWorld
इराक का बड़ा फैसला, 30 सितंबर तक सभी मिलिशिया हथियार सरकार को सौंपने का दिया कड़ा अल्टीमेटम.

इराक सरकार ने देश भर में फैले सभी मिलिशिया हथियारों को सरकारी नियंत्रण में लाने के लिए एक बहुत बड़ी और सख्त समय सीमा तय कर दी है। प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने इस पूरी योजना की शुरुआत की है और आधिकारिक तौर पर 30 सितंबर 2026 की तारीख को अंतिम समय सीमा घोषित किया है। सरकार की तरफ से साफ चेतावनी दी गई है कि इस तय तारीख के बाद अगर कोई भी सशस्त्र गतिविधि देश के कानून या सरकार के दायरे से बाहर पाई जाती है, तो उस पर देश के एंटी-टेररिज़्म लॉ के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब इराक से अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन मिशन का कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है।

राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया और विरोध

सरकार के इस नए फरमान के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है और अंदरूनी स्तर पर इसका भारी विरोध देखने को मिल रहा है। बीते 22 अगस्त 2026 को कम्युनिकेशंस मिनिस्टर Mustafa Sanad ने सार्वजनिक रूप से इस निश्चित समय सीमा को मानने से साफ इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि यह मुद्दा बहुत ज्यादा संवेदनशील और जटिल है, जिसे किसी भी मनमाने तरीके से तय तारीख पर हल नहीं किया जा सकता और इसके लिए काफी गहरी और वास्तविक चर्चा की जरूरत है। इसके अगले दिन यानी 23 अगस्त 2026 को स्टेट ऑफ लॉ कोएलिशन के Zuhair Al-Chalabi ने भी इसी तरह के विचार रखे और दावा किया कि यह डेडलाइन बिल्कुल पक्की नहीं है और इस पर अभी बहुत काम बाकी है। इसके अलावा, नस्र एलायंस के प्रवक्ता Aqeel al-Rudaini ने 19 अगस्त 2026 को ही यह चेतावनी दे दी थी कि अगर इस समय सीमा का पालन नहीं किया गया, तो देश में फिर से आपसी टकराव या गृह युद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.

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हथियार छोड़ने को लेकर गुटों में बंटी राय

हथियारों के नियंत्रण को लेकर देश के राजनीतिक और वैचारिक हालात दो हिस्सों में बंट गए हैं। सरकारी प्रवक्ता Haider Al-Aboudi ने 21 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी थी कि सरकार छह अलग-अलग सशस्त्र गुटों के साथ लगातार बातचीत कर रही है। हालांकि दूसरी तरफ, Kataib Hezbollah, Harakat al-Nujaba और Kataib Sayyid al-Shuhada जैसे ताकतवर गुटों ने अपने हथियार डालने से पूरी तरह मना कर दिया है। इन गुटों की मुख्य मांग है कि पहले अमेरिकी सेना देश से पूरी तरह बाहर जाए। वहीं इसके विपरीत, Saraya al-Salam, Asaib Ahl al-Haq और द इमाम अली बटालियन जैसे कुछ अन्य समूहों ने हथियारों पर सरकारी एकाधिकार का समर्थन करना शुरू कर दिया है। इसी बीच 21 अगस्त 2026 को उस समय तनाव और बढ़ गया जब अमेरिका द्वारा आतंकवादी घोषित संगठन हरकत हिजबुल्लाह अल-नजीबा के एक अधिकारी को काउंटर-टेररिज़्म सर्विस ने हिरासत में ले लिया, हालांकि उसे 24 घंटे के भीतर ही छोड़ दिया गया.

अंतरराष्ट्रीय दखल और विदेशी दौरा

इस पूरे घटनाक्रम में बाहरी देशों का दखल भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में ईरान के कई बड़े अधिकारी, जिनमें आईआरजीसी-कुद्स फोर्स के कमांडर Esmail Qaani और संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf शामिल हैं, बगदाद के दौरे पर आए थे। सूत्रों से यह बात सामने आई है कि ईरानी अधिकारियों ने कथित तौर पर कुछ मिलिशिया समूहों को अपने हथियार अपने पास ही रखने की सलाह दी थी। हालांकि प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने देश के आपसी राजनीतिक रिश्तों और हालातों को प्राथमिकता देते हुए इस्माइल काानी के साथ बैठक करने से इनकार कर दिया, जिससे सरकार का रुख काफी सख्त नजर आता है।

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