ईरान समर्थित इराकी सशस्त्र गुटों ने हाल के हमलों में अपना हाथ होने से सार्वजनिक रूप से इनकार किया है। हालांकि, इन गुटों ने 19 जुलाई 2026 को अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की अपनी धमकी को फिर से दोहराया है और इराक से अमेरिकी सैनिकों की पूरी तरह से वापसी की मांग की है। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 18 जुलाई को इराक में एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई।
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हमलों और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, एक अमेरिकी सैनिक की मौत उत्तरी इराक में एक ड्रोन हमले के दौरान हुई, जो एक ईरानी वन-वे अटैक ड्रोन से जुड़ा था। इस घटना के बाद अमेरिका ने ईरान की निगरानी और मिसाइल स्टोरेज साइटों पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत, जॉर्डन और बहरीन जैसे अमेरिकी सहयोगियों की ओर मिसाइलें दागीं। जॉर्डन के Aqaba Airport पर हुए हमले में भी अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचा है।
इराकी सरकार और भविष्य की योजना
इराक के प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने सभी हथियारों को सरकारी नियंत्रण में लाने का संकल्प लिया है। अमेरिका और इराक के बीच 14 जुलाई 2026 को एक समझौता हुआ है, जिसके तहत 30 सितंबर 2026 तक अमेरिकी सेना को इराक से वापस जाना है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सितंबर के बाद किसी भी गुट के पास हथियार रखने की अनुमति नहीं होगी। अमेरिका ने भी चेतावनी दी है कि वह आतंकवाद से जुड़े समूहों का समर्थन करने वाली किसी भी सरकार के साथ सहयोग नहीं करेगा। वहीं, प्रधानमंत्री ने इराक के 7 बैंकों के पुनर्वास के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के साथ एक वित्तीय समझौते का स्वागत किया है।
