Iraq में 30 जुलाई 2026 को हुई भारी बमबारी के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका और सऊदी अरब ने मिलकर Popular Mobilization Forces (PMF) के ठिकानों पर हमला किया है, जिसमें कम से कम 20 लोगों की मौत हुई और 32 लोग घायल हो गए। इराकी सरकार ने इस कार्रवाई को अपने देश की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार दिया है।
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हमले के पीछे की वजह
US Central Command (CENTCOM) ने जानकारी दी कि उन्होंने पिछले 72 घंटों में 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में यह संयुक्त कार्रवाई की है। उनका कहना है कि ये ठिकाने Iran के IRGC द्वारा नियंत्रित थे, जिनका इस्तेमाल अमेरिकी सैनिकों और सऊदी तेल सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था। सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा के लिए इसे आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है।
इराक की कड़ी प्रतिक्रिया
इराक के प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने इस घटना के बाद आपातकालीन बैठक बुलाई है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों के कारण PMF की चल रही जांच बाधित हुई है। हमलों के निशाने पर Nineveh, Baghdad, Wasit, Basra, Kirkuk, Karbala और Diyala प्रांतों में स्थित ठिकाने रहे। इराक सरकार ने अब देश से अमेरिकी बलों की वापसी और हथियारों को सरकारी नियंत्रण में लाने की प्रक्रिया पर अपना रुख और सख्त कर लिया है।
