28 जुलाई 2026 को इराक में हुए संयुक्त US-Saudi हमलों ने क्षेत्रीय स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है। इन हमलों में Popular Mobilization Forces (PMF) के कम से कम 20 सदस्य मारे गए और 32 लोग घायल हो गए। इराक की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और तत्काल तनाव कम करने की मांग की है। प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने अपनी रियाद यात्रा को फिलहाल टाल दिया है और एक आपातकालीन बैठक बुलाई है।
हमले की असल वजह और प्रतिक्रिया
US Central Command (CENTCOM) और सऊदी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ये हमले पिछले 72 घंटों में IRGC द्वारा किए गए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में किए गए थे। ये ड्रोन हमले अमेरिकी सैनिकों और सऊदी ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर किए गए थे। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे आक्रामक कार्रवाई बताया है।
क्षेत्र में बढ़ता सुरक्षा संकट
इस बीच, ईरान द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च करने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों को रोकने की खबरें भी सामने आई हैं। 29 जुलाई 2026 को जॉर्डन की सेना ने भी ईरान की ओर से आ रही 5 मिसाइलों को मार गिराया। खाड़ी देशों के संगठन GCC ने भी सऊदी अरब पर हो रहे हमलों की निंदा की है। इराक के धार्मिक नेता Muqtada al-Sadr ने भी ईरान समर्थित गुटों से इराक की जमीन का इस्तेमाल किसी भी हमले के लिए न करने की अपील की है।
