International Renewable Energy Agency (IRENA) ने एक नई रिपोर्ट जारी की है जिससे पूरी दुनिया में बिजली की कीमतों को लेकर बड़ी उम्मीद जगी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सोलर और विंड एनर्जी अब बैटरी स्टोरेज के साथ मिलकर 24 घंटे बिजली दे सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह तरीका अब पुराने कोयले और गैस से भी ज्यादा सस्ता पड़ रहा है।

सोलर और विंड एनर्जी की लागत कितनी कम हुई?

IRENA की रिपोर्ट के मुताबिक, अच्छे संसाधनों वाले इलाकों में सोलर और बैटरी स्टोरेज का खर्च 54 से 82 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा (MWh) के बीच है। अगर हम इसकी तुलना कोयले से करें, तो चीन में नए कोयला प्लांट की बिजली का खर्च 70 से 85 डॉलर प्रति MWh है। वहीं, दुनिया भर में गैस से बनने वाली बिजली का खर्च 100 डॉलर प्रति MWh से भी ज्यादा है।

24 घंटे बिजली देने वाला नया सिस्टम क्या है?

  • हाइब्रिड समाधान: सोलर और विंड पावर को अब बैटरी स्टोरेज के साथ जोड़ा गया है ताकि बिजली का फ्लो बना रहे।
  • किफायती विकल्प: यह नया सिस्टम अब जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) के मुकाबले काफी सस्ता हो गया है।
  • विश्वसनीयता: रिपोर्ट में कहा गया है कि ये हाइब्रिड सिस्टम अब भरोसेमंद हैं और लगातार बिजली देने में सक्षम हैं।

संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव António Guterres ने भी इस विषय पर अपना बयान दिया है और इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सोलर और विंड एनर्जी अब 24 घंटे कैसे काम करेगी?

बैटरी स्टोरेज के इस्तेमाल से दिन में बनी अतिरिक्त बिजली को स्टोर किया जा सकता है, जिससे रात में भी बिना रुके बिजली की सप्लाई जारी रहती है।

कोयले के मुकाबले सोलर बिजली कितनी सस्ती है?

सोलर प्लस स्टोरेज का खर्च 54-82 डॉलर प्रति MWh है, जबकि चीन में नए कोयले की बिजली का खर्च 70-85 डॉलर प्रति MWh तक आता है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com