IRGC कमांडर का बड़ा दावा, दुश्मनों का मकसद ईरान को बांटना और उसकी ताकत कमजोर करना है.

Nura Basta18 August 20262 min read62 viewsWorld
IRGC कमांडर का बड़ा दावा, दुश्मनों का मकसद ईरान को बांटना और उसकी ताकत कमजोर करना है.

इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्स यानी IRGC के डिप्टी कमांडर मेजर जनरल मोस्टाफा इजादी ने 18 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान के विरोधी देश लगातार देश को बांटने, अंदरूनी ताकत को कमजोर करने और सुरक्षा व्यवस्था को बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं. जनरल इजादी के मुताबिक, इन दुश्मन ताकतों का मुख्य मकसद देश के टुकड़े करना, तेल के संसाधनों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा करना, ईरानी-इस्लामिक सभ्यता को खत्म करना, सशस्त्र बलों और रेजिस्टेंस फ्रंट को कमजोर करना और ईरान के परमाणु उद्योग को पूरी तरह तबाह करना है. इन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्होंने साफ किया कि सूझबूझ भरी लीडरशिप की वजह से ईरान ने इन सभी चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया है और वह अपनी परमाणु तकनीक और वैज्ञानिक विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता रहेगा.

सैन्य रुख और आक्रामक तैयारी

यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश में सैन्य तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है. इससे पहले 17 अगस्त 2026 को ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया था कि अगर कूटनीतिक प्रयास नाकामयाब होते हैं, तो देश पूरी तरह से आक्रामक रुख अपनाएगा और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तोड़ने के लिए हमला करेगा. ब्रिगेडियर जनरल यादollah जवानी, जो कि IRGC के राजनीतिक डिप्टी हैं, उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की है कि सशस्त्र बल अब रक्षा के मोर्चे पर ज्यादा आक्रामक और बदलाव लाने वाले तरीके अपना रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, ईरानी संसद के सदस्य मनौचेहर मोत्ताकी ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि इराक, कुवैत या बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर कब्जा करना चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष में एक बड़ा और निर्णायक कदम साबित हो सकता है.

कूटनीतिक बातचीत और ओमान के साथ समझौता

एक तरफ जहां सैन्य तनाव चल रहा है, वहीं दूसरी और कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत का दौर जारी है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने यह बात पक्की की है कि तेहरान बाहरी दबाव के आगे झुककर अपनी नीतियों में कोई बदलाव नहीं करेगा. उन्होंने यह भी ऐलान किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आने-जाने वाले रास्तों को लेकर ओमान के साथ एक समझौता तय हो गया है. इसके अलावा, देश के शीर्ष राजनयिक अब्बास अरागची ने अपने इराकी समकक्ष के साथ मिलकर उन साजिशों पर चर्चा की, जिनका मकसद इराकी कुर्द प्रधानमंत्री के दफ्तर पर हुए हालिया हमले के बाद दोनों देशों के बीच दूरियां पैदा करना था. अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर अहमद वाहिदी के नाम से वायरल हो रही एक फर्जी पोस्ट, जिसमें परमाणु हथियार बनाने की बात कही गई थी, वह दुश्मनों की एक सोची-समझी चाल है जिसका मकसद युद्धविराम की बातचीत को खतरे में डालना है.

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