IRGC का बढ़ा दबदबा, ईरान की युद्ध नीति और कूटनीति पर सेना का शिकंजा.

Aanya25 August 20262 min read51 viewsEnglish
IRGC का बढ़ा दबदबा, ईरान की युद्ध नीति और कूटनीति पर सेना का शिकंजा.

ईरान में चल रहे मौजूदा क्षेत्रीय संकट के बीच युद्ध और शांति के फैसलों पर Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) और देश की सुरक्षा व्यवस्था का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान नौसेना के पूर्व वाइस एडमिरल और रक्षा विश्लेषक Ahmed Saeed ने इस बात पर जोर दिया है कि देश की राष्ट्रीय नीति तय करने में अब सैन्य नेतृत्व को बहुत ज्यादा अधिकार मिल चुके हैं। यह बदलाव तब और साफ हो गया जब 10 अगस्त 2026 को IRGC के पूर्व कमांडर Mohsen Rezaei को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सेक्रेटरी नियुक्त किया गया, जो सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं।

मोहसेन रेजाई के बयानों से सरकार के भीतर बढ़ा तनाव

मोहसेन रेजाई की हालिया बयानबाजी, जिसमें तेल निर्यात बंद करने की धमकियां और परमाणु नीति में संभावित बदलाव की बातें शामिल हैं, ने राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के साथ आंतरिक कलह पैदा कर दी है। राष्ट्रपति चाहते हैं कि जब तक ईरान के पास रणनीतिक बढ़त है, तब तक इस संघर्ष को समाप्त किया जाए। वहीं दूसरी तरफ, संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने जनता के भूखे रहने के जोखिमों पर खुलकर बात की है। आंतरिक सुरक्षा पर सेना के इस कड़े नियंत्रण के बावजूद, पाकिस्तान ने राजनयिक स्तर पर कुछ प्रगति होने की बात कही है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

पाकिस्तान के मंत्रियों का तेहरान दौरा

24 अगस्त 2026 को पाकिस्तान के इंटीरियर मिनिस्टर Mohsin Naqvi और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल Asim Munir ने तेहरान की यात्रा की। उन्होंने वहां चल रहे युद्ध को लेकर चर्चा की, जिसकी शुरुआत अमेरिका और इजराइल की कार्रवाइयों के बाद 28 फरवरी 2026 को हुई थी। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई इस मुलाकात को काफी सकारात्मक बताया। इसके अलावा, राष्ट्रपति कार्यालय के Seyed Mehdi Tabatabaei ने भी जानकारी दी कि इन वार्ताओं से बड़े कूटनीतिक परिणाम सामने आए हैं जो आने वाले समय में देखने को मिलेंगे।

अमेरिका के साथ बढ़ती तनातनी और प्रतिबंध

दूसरी तरफ, ईरानी सुरक्षा तंत्र के भीतर वाशिंगटन को लेकर अविश्वास अभी भी पूरी तरह से कायम है। 24 अगस्त 2026 को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने साफ कहा कि तेहरान अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए प्रतिबंधों का कड़ा जवाब देगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इन प्रतिबंधों का समर्थन करने वाले किसी भी तीसरे पक्ष के देश के कदम को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। यह तनाव अमेरिका द्वारा शुरू किए गए 'Operation Economic Outcast' के बाद और ज्यादा बढ़ गया है, जिसके तहत हाल ही में 60 से ज्यादा लोगों, कंपनियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन कदमों से ईरान की शिपिंग, टेक्नोलॉजी, एविएशन, डिजिटल एसेट्स और गोल्ड सेक्टर तक की पहुंच प्रभावित हो रही है। ईरानी नेतृत्व को इस बात की लगातार चिंता सता रही है कि इन आर्थिक दबावों की वजह से देश के भीतर मुश्किलें बढ़ सकती हैं और आम जनता के बीच अशांति भड़कने का खतरा पैदा हो सकता है।

Share:

Comments

Leave a comment