ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के तहत हमलों की 19वीं और 20वीं लहर शुरू कर दी है। 4 मार्च 2026 को हुए इन हमलों में खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़राइली संस्थानों को निशाना बनाया गया। यह ऑपरेशन या हसन इब्न अली कोड नेम के साथ शुरू हुआ। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान पर हुए पिछले हमलों के जवाब में की जा रही है जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता पैदा हो गई है।

हमले में किन ठिकानों को बनाया गया निशाना

IRGC की रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी के कई देशों में अमेरिकी सेना की संपत्तियों को भारी नुकसान पहुँचाने का दावा किया गया है। हमलों की मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

  • कुवैत और बहरीन: कुवैत के अली अल-सलेम और बहरीन के सलमान पोर्ट पर मौजूद अमेरिकी नौसेना बेस पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया गया।
  • UAE: अल रुवैस में मौजूद अमेरिकी THAAD रडार सिस्टम को नष्ट करने की खबर है।
  • समुद्री संपत्ति: USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत पर चार क्रूज मिसाइलें दागी गईं और तीन तेल टैंकरों में आग लगने की सूचना है।
  • इज़राइल: इज़राइल के सुरक्षा मंत्रालय और बेन गुरियन एयरपोर्ट को भी हमले की 20वीं लहर में निशाना बनाया गया।

भारतीय प्रवासियों और खाड़ी क्षेत्र पर प्रभाव

खाड़ी देशों में चल रहे इस सैन्य तनाव का सीधा असर वहां रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों पर पड़ने की संभावना है। कुवैत, बहरीन और UAE जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार रहते हैं और सैन्य ठिकानों के पास होने वाले इन धमाकों से आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। तेल टैंकरों पर हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों में बदलाव आ सकता है। IRGC ने दावा किया है कि इस संघर्ष में अब तक 560 अमेरिकी सैनिक हताहत हुए हैं जबकि जवाबी हमलों में ईरानी नागरिक ठिकानों को भी नुकसान पहुँचा है। हवाई सेवाओं और समुद्री रास्तों पर इसका असर दिखने लगा है जिससे यात्रा करने वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।