ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 21 मार्च 2026 को ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत 71वें चरण की शुरुआत करने का ऐलान किया है। नए साल और ईद के मौके पर शुरू किए गए इस ऑपरेशन में ईरान ने नई युद्ध रणनीतियों और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है। IRGC के मुताबिक, यह हमला दुश्मन की कमजोरियों को परखने के बाद किया गया है ताकि उनके लिए युद्ध के मैदान में स्थितियां और मुश्किल हो सकें।

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किन जगहों को बनाया गया निशाना और कौन से हथियार हुए इस्तेमाल?

ईरान ने इस ऑपरेशन के दौरान इजरायल के कई शहरों और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना लक्ष्य बताया है। IRGC ने दावा किया कि उन्होंने तेल अवीव, हाइफा और हदेरा जैसे शहरों के साथ-साथ कुवैत, सऊदी अरब और यूएई में मौजूद अमेरिकी अड्डों पर मिसाइलें दागी हैं। इन हमलों में इस्तेमाल किए गए हथियारों की जानकारी नीचे दी गई है:

  • Emad Missiles: भारी और सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलें।
  • Qadr and Qiam Systems: मल्टी-वारहेड और आधुनिक मिसाइल सिस्टम।
  • Attack Drones: दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने वाले ड्रोन।
  • Khorramshahr-4: लंबी दूरी तक मार करने वाला मिसाइल सिस्टम।

तेल रिफाइनरियों और ग्लोबल मार्केट पर क्या असर हुआ?

इन सैन्य कार्रवाइयों का असर खाड़ी देशों के तेल और गैस बुनियादी ढांचे पर भी देखा गया है। कुवैत की मीना अब्दुल्ला और मीना अल-अहमदी रिफाइनरियों में ड्रोन हमलों की वजह से आग लगने की खबरें मिली हैं, जिससे दुनिया भर के बाजारों में हलचल मच गई है। इसके अलावा इजरायल की हाइफा रिफाइनरी पर भी हमले का दावा किया गया है।

स्थान निशाना बनाया गया ठिकाना
कुवैत Ali Al Salem Air Base, मीना अब्दुल्ला रिफाइनरी
सऊदी अरब Al Kharj सैन्य अड्डा
UAE Al-Dhafra एयर बेस
इजरायल Tel Aviv, Rishon LeZion, Haifa
बहरीन अमेरिकी पांचवें बेड़े का मुख्यालय

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने खाड़ी देशों पर ईरान के इन हमलों की कड़ी निंदा की है और एक प्रस्ताव पारित कर हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है। वहीं इजरायली प्रधानमंत्री ने इन दावों के बीच कहा कि ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता कम हो गई है। फिलहाल इस क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और प्रवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।