ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने शनिवार, 21 मार्च 2026 को ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत जवाबी हमलों का 70वां चरण शुरू करने का ऐलान किया है। IRGC के आधिकारिक बयान के मुताबिक, हमले की शुरुआत के साथ ही लक्षित क्षेत्रों में तेज धमाके, आग की लपटें और धुएं के गुबार देखे गए। इस कार्रवाई में खाड़ी देशों और इराक में स्थित पांच प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकानों को सीधा निशाना बनाया गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए की गई है।

किन अमेरिकी ठिकानों और शहरों को बनाया गया निशाना?

ईरान की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस 70वें हमले में अमेरिका और इजराइल के कब्जे वाले 55 से ज्यादा स्थानों को निशाना बनाया गया है। इसमें खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण देशों में स्थित अमेरिकी बेस शामिल हैं।

  • सऊदी अरब: अल-खर्ज (al-Kharj) सैन्य बेस को निशाना बनाया गया।
  • UAE: अल-धफरा (al-Dhafra) एयर बेस पर हमला हुआ।
  • कुवैत: अली अल-सालेम (Ali al-Salem) सैन्य ठिकाने पर कार्रवाई की गई।
  • बहरीन: अमेरिकी पांचवें बेड़े (US Fifth Fleet) के मुख्यालय पर प्रहार किया गया।
  • इराक: कुर्दिस्तान के एरबिल (Erbil) में स्थित अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया गया।

इसके अलावा इजराइल के हाइफा पोर्ट और तेल अवीव के रणनीतिक क्षेत्रों जैसे हडेरा, किर्यत ओनो और सावियन में भी मिसाइलें गिरने की खबरें हैं।

ईरान ने किन हथियारों का किया इस्तेमाल और क्या है मौजूदा स्थिति?

ईरान की एयरोस्पेस फोर्स ने इस ऑपरेशन में अपनी आधुनिक मिसाइल तकनीक का प्रदर्शन किया है। IRGC ने पुष्टि की है कि इस हमले में ‘कियाम’ (Qiam) और ‘इमाद’ (Emad) मिसाइल सिस्टम के साथ-साथ हमलावर ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है।

हथियार का नाम विवरण
Khorramshahr-4 भारी पेलोड ले जाने वाली आधुनिक मिसाइल
Qadr Missile System मल्टी-वॉरहेड तकनीक से लैस सिस्टम
Attack Drones लगातार हमले और निगरानी के लिए उपयोग
Qiam & Emad सटीक निशाना लगाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इन हमलों को आत्मरक्षा का अधिकार बताया है। दूसरी ओर, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि अमेरिकी और इजराइली कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी नुकसान पहुँचाया है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि हवाई यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।