इस्लामाबाद और रावलपिंडी में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है. अमेरिकी वायुसेना के C-17 विमान जरूरी सामान और सुरक्षा उपकरणों के साथ नूर खान एयरबेस पर उतरे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच एक नए दौर की बातचीत होने वाली है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. सुरक्षा के कारण शहर के कई हिस्सों को पूरी तरह सील कर दिया गया है.

इस्लामाबाद और रावलपिंडी में सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं?

रावलपिंडी में 10,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी, 400 कमांडो और करीब 100 स्नाइपर्स को छतों पर तैनात किया गया है. रेड ज़ोन और नूर खान एयरबेस के आसपास के इलाकों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. शहर में बस और ट्रक जैसी ट्रांसपोर्ट सेवाएं फिलहाल रोक दी गई हैं. होटलों में मेहमानों का रिकॉर्ड मांगा गया है और सेरेना होटल से सभी मेहमानों को बाहर जाने के लिए कहा गया है.

अमेरिका और ईरान के बीच क्या चर्चा होने वाली है?

अमेरिकी दूत Steve Witkoff और Jared Kushner 25 अप्रैल को इस्लामाबाद पहुंचेंगे. ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi 24 अप्रैल को ही वहां पहुंच चुके हैं. व्हाइट हाउस ने बताया कि ईरान ने ही इस नई बैठक की मांग की थी. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ उनकी कोई सीधी मुलाकात नहीं होगी और सारी बातें पाकिस्तानी अधिकारियों के जरिए पहुंचाई जाएंगी.

इस पूरी बैठक के पीछे क्या वजह है?

राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान एक ऑफर दे रहा है, जिसका अमेरिका जांच करेगा. उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमले हो सकते हैं. इससे पहले 11-12 अप्रैल को हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हुई थी. अब दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि पाकिस्तान की मदद से इन दोनों देशों के बीच कोई रास्ता निकलता है या नहीं.

Sushma Kumari

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