पश्चिम एशिया में एक नया सैन्य संगठन आकार ले रहा है जिसे ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जा रहा है। सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच सितंबर 2025 में हुए रक्षा समझौते का विस्तार किया जा रहा है और अब इसमें तुर्किये के शामिल होने की बातचीत अंतिम चरण में है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य एक देश पर हुए हमले को सभी सदस्य देशों पर हमला मानकर सामूहिक जवाब देना है।

इस्लामिक नाटो का क्या है पूरा प्लान?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब की आर्थिक ताकत, तुर्किये की आधुनिक सैन्य तकनीक और पाकिस्तान की परमाणु क्षमता को मिलाकर एक मजबूत गुट बनाने की तैयारी है। यह पश्चिमी देशों के नाटो (NATO) संगठन की तर्ज पर काम करेगा। इसका मकसद क्षेत्र में ईरान जैसे प्रतिद्वंद्वियों का मुकाबला करना और अमेरिका पर सुरक्षा निर्भरता को कम करना है।

इन तीन देशों के पास कितनी ताकत है?

इस गठबंधन में शामिल देशों और भारत की आर्थिक और सैन्य ताकत की तुलना नीचे दी गई है:

देश जीडीपी (ट्रिलियन डॉलर) रक्षा बजट (अरब डॉलर)
सऊदी अरब 2.69 78
तुर्किये 1.5 26.6
पाकिस्तान 0.41 9
भारत 4.18 81

भारत के लिए सुरक्षा का खतरा क्यों?

इस संगठन में पाकिस्तान और तुर्किये की मौजूदगी भारत के लिए चिंता का विषय है। जानकारों का कहना है कि यह गठबंधन दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को बदल सकता है। कश्मीर मुद्दे पर तुर्किये और सऊदी अरब का पाकिस्तान को समर्थन मिलने से भारत के खिलाफ कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है। साथ ही सऊदी अरब के दिए हथियार पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने की आशंका भी जताई गई है।

समझौते के नियम और शर्तें क्या हैं?

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ (SMDA) के तहत अगर किसी एक देश पर बाहरी हमला होता है, तो दूसरा देश अपनी सेना और संसाधनों के साथ मदद करेगा। तुर्किये के जुड़ने के बाद यह दायरा और बढ़ जाएगा, जिसमें ड्रोन तकनीक और एयर डिफेंस सिस्टम का साझा इस्तेमाल शामिल होगा।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.