इसराइल ने सोमालीलैंड में अपना पहला राजनयिक नियुक्त किया है, जिस पर सऊदी अरब और कई अन्य मुस्लिम देशों ने कड़ा ऐतराज जताया है। इन देशों का कहना है कि यह कदम सोमालिया की आजादी और उसकी सीमाओं का सीधा उल्लंघन है। 18 अप्रैल 2026 को कई देशों ने मिलकर इस फैसले की कड़ी निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ बताया।

आखिर पूरा मामला क्या है?

इसराइल ने 16 अप्रैल 2026 को माइकल लोटेम (Michael Lotem) को सोमालीलैंड के लिए अपना पहला गैर-निवासी राजदूत नियुक्त किया। यह फैसला तब आया जब दिसंबर 2025 में इसराइल ने सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी थी। सोमालीलैंड ने इस नियुक्ति का स्वागत किया है, लेकिन सोमालिया की संघीय सरकार इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानती है।

किन देशों ने इसराइल के फैसले का विरोध किया?

सऊदी अरब के साथ दुनिया के कई देशों ने एक साझा बयान जारी कर इस कदम की निंदा की। इन देशों का मानना है कि इसराइल का यह फैसला अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थिरता को खतरे में डाल सकता है। विरोध करने वाले मुख्य देशों की सूची नीचे दी गई है:

क्रम संख्या देश/संगठन
1 सऊदी अरब
2 मिस्र
3 सोमालिया
4 सूडान
5 लीबिया
6 बांग्लादेश
7 अल्जीरिया
8 फिलिस्तीन
9 तुर्की
10 इंडोनेशिया
11 अरब लीग और OIC

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की क्या प्रतिक्रिया रही?

अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल घीत ने इस नियुक्ति को एक गंभीर तनाव बताया। उन्होंने कहा कि इस फैसले का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है। वहीं, ओआईसी (OIC) ने इसराइल को एक कब्जा करने वाली शक्ति कहा और सोमालिया की मान्यता प्राप्त सरकार को अपना पूरा समर्थन दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अफ्रीकी संघ ने भी पहले इस मुद्दे पर इसराइल की आलोचना की थी।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.