Lebanon के Yaroun गाँव में इसराइली सेना ने एक धार्मिक इमारत को भारी नुकसान पहुँचाया है. एक Catholic चैरिटी ने इसे जानबूझकर किया गया हमला बताया है और दावा किया है कि यह एक convent यानी मठ था. इस घटना के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद शुरू हो गया है, क्योंकि यह सब एक ceasefire के दौरान हुआ है.
इसराइल और Catholic चैरिटी के दावों में क्या अंतर है?
Israeli military ने स्वीकार किया कि उनके सैनिकों ने Yaroun गाँव में एक धार्मिक इमारत को नुकसान पहुँचाया. सैन्य प्रवक्ता Colonel Avichay Adraee ने कहा कि सैनिक वहाँ “आतंकवादी ढांचे” को खत्म कर रहे थे और उन्हें शुरू में यह पता नहीं चला कि वह एक धार्मिक इमारत है. इसराइल का दावा है कि Hezbollah इस जगह से रॉकेट हमले कर रहा था. वहीं, French Catholic चैरिटी L’Oeuvre d’Orient ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. उन्होंने बताया कि यह Salvatorian Sisters का एक convent था जिसे जानबूझकर नष्ट किया गया.
इमारत के नुकसान और स्थानीय प्रतिक्रिया पर क्या जानकारी मिली?
- लेबनान की रिपोर्ट: Lebanese National News Agency (NNA) के मुताबिक, इसराइली सेना ने एक मठ और उससे जुड़े स्कूल को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया.
- चर्च का बयान: Catholic Center for Information के Director Rev. Abdo Abou Kassm ने इसराइल के दावों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि प्रार्थना स्थल शांति के लिए होते हैं, वे कोई मिलिट्री बेस नहीं होते.
- अन्य दावे: Basilian Salvatorian Sisters की Superior General Gladys Sabbagh ने बताया कि इस परिसर में दो नन रहती थीं और यहाँ एक स्कूल और क्लिनिक भी था.
- अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: अमेरिका की पूर्व सांसद Marjorie Taylor Greene ने इस घटना के बाद अमेरिका से इसराइल की फंडिंग रोकने की मांग की है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
लेबनान के Yaroun में असल में क्या हुआ था?
2 मई 2026 को इसराइली सेना ने Yaroun गाँव में एक धार्मिक इमारत को नुकसान पहुँचाया, जिसे Catholic चैरिटी ने Salvatorian Sisters का convent बताया है.
इसराइली सेना ने इस हमले का क्या कारण बताया है?
इसराइली सेना का दावा है कि वे वहाँ Hezbollah के आतंकवादी ढांचे को नष्ट कर रहे थे और उन्हें जानकारी मिली थी कि उस जगह से रॉकेट हमले किए जा रहे थे.