इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने अब एक नया और गंभीर रूप ले लिया है। इजराइली सेना ने तेहरान में ईरान के मुख्य स्पेस रिसर्च सेंटर को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। यह हमला शुक्रवार 13 मार्च 2026 की देर रात को किया गया था। सऊदी न्यूज़ 50 की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान के उन मिलिट्री सैटेलाइट्स को नष्ट करना था जो मध्य पूर्व में निगरानी और हमलों के लिए इस्तेमाल होते थे। इसके साथ ही खाड़ी देशों में भी इस युद्ध का असर साफ देखा जा रहा है।

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तेहरान में क्या-क्या हुआ तबाह

इजराइल की सेना (IDF) ने मिलिट्री इंटेलिजेंस की मदद से यह सटीक हमला किया। इस हमले में ईरान की स्पेस एजेंसी (ISA) के उन बड़े लैब्स को निशाना बनाया गया जहां मिलिट्री सैटेलाइट बनाए जाते थे। इसके अलावा, ईरान के हवाई रक्षा सिस्टम बनाने वाली फैक्ट्रियों पर भी बम बरसाए गए। इजराइल के रक्षा मंत्री ने साफ कहा है कि यह युद्ध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच गया है और हमले जरूरत पड़ने तक जारी रहेंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी जानकारी दी है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के मुख्य तेल हब खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है।

सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों पर असर

इस तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले आम लोगों और प्रवासियों पर भी पड़ रहा है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उन्होंने अपनी सीमा की तरफ आ रहे 56 ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके अलावा कतर में भी मिसाइलें दागी गईं जिन्हें रोक दिया गया। तुर्की में नाटो के एयर डिफेंस ने एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोका और जॉर्डन के अम्मान शहर में सुरक्षा सायरन बजने लगे। यह स्थिति उन सभी लोगों के लिए चिंता का विषय है जो इन देशों में काम करते हैं या अक्सर सफर करते हैं।

युद्ध के कारण जान-माल का भारी नुकसान

इस संघर्ष में अब तक भारी तबाही हो चुकी है और कई लोगों की जान गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में ईरान में 1300 और लेबनान में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने अब तक ईरान में करीब 15,000 ठिकानों पर हमले किए हैं। Strait of Hormuz के बंद होने के कारण तेल की सप्लाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने इसे तेल की सप्लाई में इतिहास की सबसे बड़ी रुकावट बताया है।