अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशें जारी हैं, लेकिन इसराइल को इस पर भरोसा नहीं है। इसराइल की सेना ने साफ कह दिया है कि अगर वाशिंगटन और तेहरान की बातचीत फेल हुई, तो वह दोबारा बड़े हमले शुरू कर देगा। दुनिया की नजरें अब 11 अप्रैल को होने वाली मीटिंग पर टिकी हैं, जबकि युद्ध का खतरा अभी भी मंडरा रहा है।

अमेरिका और ईरान की बातचीत में क्या है खास?

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 11 अप्रैल 2026 को बड़ी मीटिंग होने वाली है। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान की तरफ से संसद स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालिबाफ बातचीत करेंगे। अमेरिका चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोला जाए और ईरान अपना यूरेनियम सौंप दे। वहीं, ईरान लेबनान में तुरंत युद्धविराम और अपनी रुकी हुई संपत्ति वापस मांग रहा है।

इसराइल ने हमले की क्या तैयारी की है?

इसराइल की सेना का मानना है कि बातचीत का सफल होना मुश्किल है। उन्होंने अपनी एक फिक्स्ड प्लानिंग तैयार कर ली है, जिसके तहत ईरान के एनर्जी सेंटर्स को निशाना बनाया जा सकता है। पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने का आदेश दिया है। इसराइल ने कहा है कि बातचीत का नतीजा चाहे जो भी हो, उसके सैन्य ऑपरेशन नहीं रुकेंगे।

ताजा हालात और सैन्य कार्रवाई की जानकारी

मुख्य बिंदु ताजा अपडेट
हिजबुल्लाह रॉकेट लॉन्चर 2 मार्च से 200 से ज्यादा नष्ट किए गए
ताजा हमले 10 अप्रैल को हिजबुल्लाह ने 30 प्रोजेक्टाइल दागे
ट्रम्प की चेतावनी नियम न मानने पर हमलों को और बढ़ाने की बात कही
ईरान की शर्त लेबनान में हमले रुकने तक बातचीत टालने की धमकी दी
समुद्री रास्ता ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में माइन बिछाने के संकेत दिए
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.