इसराइल और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। इसराइल की सेना ने एलान किया है कि वे ईरान की तरफ से होने वाले किसी भी संभावित बैलिस्टिक मिसाइल हमले के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बेरूत में हुए हालिया हमलों के बाद अब दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका है।

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सेना ने जारी किया हाई अलर्ट

इसराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने 14 जून 2026 को शाम 5:07 बजे बताया कि सेना किसी भी वक्त होने वाले ईरानी हमले का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने देश के होम फ्रंट को हाई अलर्ट पर रहने की सलाह दी है। यह तैयारी बेरूत में किए गए उन हवाई हमलों के जवाब में है, जिन्हें इसराइल ने हिजबुल्लाह के ड्रोन हमलों का बदला बताया है।

बेरूत में हमले और सैन्य कार्रवाई

इसराइल ने बेरूत के दहिये इलाके में हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे पर सटीक हमले किए हैं। IDF के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में हिजबुल्लाह के 70 से ज्यादा आतंकवादी ठिकानों को तबाह किया गया है। इसके अलावा, लेबनान की सीमा से आ रहे एक संदिग्ध हवाई लक्ष्य को भी हवा में ही रोक दिया गया। सुरक्षा कारणों से दक्षिण लेबनान के 29 गांवों को खाली करने का आदेश भी दिया गया है।

ईरान की चेतावनी और शांति डील पर संकट

ईरान की तरफ से ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद जाफर असदी ने कहा कि बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में इसराइल की कार्रवाई का जवाब जरूर दिया जाएगा। वहीं, ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागर कालिबाफ ने चेतावनी दी है कि इस हमले से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति बातचीत खतरे में पड़ सकती है।

अमेरिका और अन्य देशों की भूमिका

  • अमेरिका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 जून को घोषणा की थी कि 14 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता (MoU) साइन होगा, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल जाएगा।
  • ईरान की शर्त: विदेश मंत्री अब्बास अरागची के अनुसार, किसी भी समझौते के लिए लेबनान में इसराइल की सैन्य कार्रवाई का बंद होना जरूरी है।
  • मध्यस्थता: इस शांति डील को अंतिम रूप देने के लिए कतर और पाकिस्तान सक्रिय रूप से मध्यस्थता कर रहे हैं।

इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने संयुक्त बयान में साफ किया है कि इसराइल अपनी जमीन पर होने वाले किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा।