इसराइल की सेना पर फिलिस्तीनियों के साथ बड़े पैमाने पर यौन शोषण करने के गंभीर आरोप लगे हैं। Ramallah स्थित Women’s Centre for Legal Aid and Counselling (WCLAC) की Advocacy Unit Manager किफ़ाया ख्रैम ने इसे एक व्यवस्थित तरीका बताया है। इस खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है क्योंकि कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी इसकी पुष्टि की है।

यौन शोषण के आरोपों में क्या-क्या बातें सामने आईं

  • Kifaya Khraim का दावा: उन्होंने Al Jazeera को बताया कि यह कोई छिटपुट घटनाएं नहीं हैं बल्कि एक सिस्टम की तरह काम कर रहा है। उन्होंने महिलाओं की जबरन तलाशी लेने, उन्हें नग्न करने और उनके साथ बलात्कार करने के मामले बताए।
  • Addameer की रिपोर्ट: कैदियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले समूह Addameer ने 5 मई 2026 को बताया कि हिरासत केंद्रों में यौन हिंसा का एक पैटर्न देखा गया। इसमें 12 बलात्कार के मामले सामने आए जिनमें कई सैनिकों ने हिस्सा लिया।
  • UN विशेषज्ञों की राय: 30 अप्रैल 2026 को संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कहा कि यौन हिंसा का इस्तेमाल फिलिस्तीनियों को नियंत्रित करने और उन्हें विस्थापित करने के लिए एक हथियार के रूप में किया गया।
  • Euro-Med की रिपोर्ट: महा हुसैन ने बताया कि लगभग हर रिहा हुआ फिलिस्तीनी बंदी यौन हिंसा का शिकार हुआ या उसने इसे अपनी आंखों से देखा।

Sde Teiman जेल विवाद और इसराइल सरकार का रुख

Sde Teiman सैन्य जेल में एक फिलिस्तीनी बंदी के साथ यौन शोषण का मामला उठा था। 12 मार्च 2026 को इसराइल की सेना ने पांच सैनिकों पर से आरोप हटा दिए। सेना ने इसके पीछे प्रक्रियात्मक कठिनाइयों और बंदी के गवाही न दे पाने का कारण बताया। Amnesty International ने इस फैसले की कड़ी निंदा की और इसे अपराधियों को बचाने वाला कदम बताया।

हालांकि आरोप हटाने के बाद भी 16 अप्रैल 2026 को चीफ ऑफ स्टाफ एयाल ज़मीर ने उन सैनिकों को दोबारा सेवा में लौटने की मंजूरी दे दी। दूसरी तरफ इसराइल की सेना इन सभी आरोपों से इनकार करती है। उनका कहना है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में काम करते हैं और हर घटना की जांच की जाती है। जेनेवा में इसराइल के मिशन ने UN की रिपोर्ट को निराधार बताया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस मामले में क्या कहा है

UN कमीशन ऑफ इंक्वायरी ने मार्च 2025 में कहा था कि यौन और लैंगिक हिंसा को इसराइल द्वारा युद्ध के तरीके के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और यह वहां की सुरक्षा बलों की मानक संचालन प्रक्रिया बन गई है।

Amnesty International ने इसराइल के फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी

Amnesty International ने उन सैनिकों पर से आरोप हटाने के फैसले को गलत बताया। उन्होंने कहा कि यह इसराइल की कानूनी प्रणाली का पुराना इतिहास है जिसमें गंभीर अपराध करने वालों को सजा से बचाया जाता है।