इज़रायली सेना (IDF) ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को बहुत तेज़ कर दिया है। 24 मार्च 2026 को हुई ताज़ा एयर स्ट्राइक में ईरान की राजधानी तेहरान में मौजूद कई सरकारी इमारतों और IRGC के खुफिया मुख्यालयों को निशाना बनाया गया है। इज़रायल का दावा है कि उसने ईरान की मिसाइल मारक क्षमता को काफी हद तक कम कर दिया है और उनके दो-तिहाई मिसाइल लॉन्चर्स को तबाह कर दिया है। इस युद्ध का सीधा असर अब खाड़ी देशों और दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है।

इज़रायल ने ईरान में किन ठिकानों को बनाया निशाना?

इज़रायली सेना के मुताबिक, यह हमले सोमवार से शुरू हुए और मंगलवार सुबह तक जारी रहे। सेना ने तेहरान के मुख्य सुरक्षा मुख्यालय पर हमला किया जो IRGC का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इज़रायल ने निम्नलिखित प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाने की पुष्टि की है:

  • खुफिया मुख्यालय: तेहरान में स्थित IRGC के दो बड़े इंटेलिजेंस सेंटर और ईरान के खुफिया मंत्रालय की इमारत।
  • मिसाइल गोदाम: बैलिस्टिक मिसाइलों को रखने वाले सुरक्षित ठिकाने और गोदाम।
  • कुद्स फोर्स बेस: वह केंद्र जहाँ से क्षेत्रीय सैन्य और खुफिया गतिविधियों को चलाया जाता है।
  • हथियार कारखाने: नौसेना की मिसाइल और हथियारों के वारहेड बनाने वाले रिसर्च सेंटर।

इज़रायली सेना का कहना है कि यह हमले बहुत सोच-समझकर किए गए ताकि आम लोगों को कम से कम नुकसान हो। हालांकि, तेहरान में मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि धमाके इतने तेज़ थे कि पूरी राजधानी थर्रा गई थी।

क्षेत्रीय तनाव और अन्य देशों पर युद्ध का प्रभाव

ईरान ने इन हमलों के जवाब में इज़रायल पर कई मिसाइलें दागी हैं, जिनमें से कुछ तेल अवीव के रिहाइशी इलाकों में गिरी हैं। इसके साथ ही खाड़ी देशों से भी मिसाइल हमलों और मलबे की खबरें सामने आई हैं। ताजा स्थिति को नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:

  • इज़रायल
  • देश या संस्था ताजा घटनाक्रम
    UAE और सऊदी अरब ईरान द्वारा मिसाइल हमले की खबरें मिली हैं।
    तेल अवीव में 100 किलो का वारहेड गिरने से नुकसान हुआ।
    अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने ऊर्जा ठिकानों पर हमला रोकने के लिए 5 दिन की मोहलत दी है।
    कुवैत मिसाइल का मलबा गिरने से बिजली की लाइनों में खराबी आई।
    ईरान ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब के मारे जाने की भी खबर है।
    लेबनान इज़रायल ने बेरूत के दक्षिणी हिस्सों में भी बमबारी की है।

    इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिका के युद्धविराम के सुझावों के बावजूद ईरान और लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे। वहीं पाकिस्तान और मिस्र जैसे देश इस युद्ध को रोकने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इस तनाव की वजह से तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है जो 1970 के दशक से भी बुरा साबित होगा।

    Sushma Kumari

    Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com