अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मदद से दो हफ्ते का संघर्ष विराम समझौता हुआ है। इस समझौते के ठीक बाद इसराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर एक बड़ा हमला किया है जिसमें कम से कम 254 लोगों की जान चली गई। पूर्व अमेरिकी आतंकवाद विरोधी प्रमुख जो केंट ने पहले ही चेतावनी दी थी कि इसराइल इस शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुँचा सकता है और उन्होंने वाशिंगटन से इसराइल की सैन्य मदद पर रोक लगाने की मांग की थी।

जो केंट ने अपनी चेतावनी में क्या कहा था?

पूर्व अमेरिकी अधिकारी जो केंट ने इस्तीफा देने के बाद एक वीडियो संदेश में कहा कि इसराइल फिर से वही कर सकता है जो उसने पिछली बातचीत के दौरान किया था। केंट के मुताबिक इसराइल शांति वार्ता को पटरी से उतारने के लिए बातचीत करने वालों को निशाना बना सकता है या हमले तेज कर सकता है। उन्होंने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह इसराइल को मिलने वाली सैन्य सहायता को कम करना शुरू करे ताकि उसे शांति समझौतों का उल्लंघन करने से रोका जा सके। जो केंट ने यह भी कहा कि ईरान के साथ अमेरिका का विवाद इसराइल के दबाव की वजह से शुरू हुआ था।

संघर्ष विराम और मौजूदा हालात की मुख्य जानकारी

अमेरिका और ईरान के बीच यह दो हफ्ते का संघर्ष विराम 7 अप्रैल 2026 को लागू हुआ था। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खुलवाना और क्षेत्र में शांति लाना था। हालांकि इस समझौते के बावजूद इसराइल ने लेबनान में भारी हमला किया जिसे उसका अब तक का सबसे बड़ा समन्वित हमला माना जा रहा है।

तारीख महत्वपूर्ण घटनाक्रम
7 अप्रैल 2026 अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के संघर्ष विराम की घोषणा
8 अप्रैल 2026 इसराइल का बेरूत पर भीषण हमला, 254 लोगों की मौत
10 अप्रैल 2026 इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच इन-पर्सन बातचीत शुरू होगी

इसराइल और अन्य देशों का इस पर क्या रुख है?

इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता लेबनान पर लागू नहीं होता है और वे हिजबुल्लाह के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेंगे। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और ईरान के विदेश मंत्री ने इस हमले को संघर्ष विराम का उल्लंघन बताया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मांग की है कि शांति के लिए लेबनान को भी इस समझौते के दायरे में लाया जाना चाहिए ताकि हिंसा पूरी तरह से रुक सके। संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि बढ़ती हिंसा शांति की कोशिशों को खत्म कर सकती है।