इज़राइल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर किया बड़ा हमला, खाड़ी देशों में भी बढ़ा तनाव
इज़राइली सेना ने 31 मार्च 2026 को ईरान की राजधानी तेहरान के बिल्कुल बीचों-बीच सरकारी ठिकानों पर बड़ा हमला किया है। इज़राइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने दावा किया है कि उन्होंने पिछले 24 घंटों में ईरानी शासन के करीब 170 ठिकानों को निशाना बनाया है। इस हमले के बाद तेहरान के कई हिस्सों में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं और राजधानी के कुछ इलाकों में बिजली गुल हो गई है। इस ताज़ा सैन्य कार्रवाई से पूरे मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है।
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तेहरान में हुए हमले और सैन्य स्थिति क्या है?
इज़राइली सेना ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उन्होंने तेहरान के मुख्य इलाकों में ईरानी सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है। ईरानी मीडिया जैसे फ़ार्स और तसनीम न्यूज़ एजेंसी ने भी शहर में धमाकों और बिजली कटने की पुष्टि की है। इसके साथ ही लेबनान की सीमा पर भी संघर्ष जारी है, जहाँ हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई में चार इज़राइली सैनिकों के मारे जाने की खबर है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस स्थिति पर बयान देते हुए ईरान को नागरिक सुविधाओं पर हमले की चेतावनी दी है।
खाड़ी के अन्य देशों पर इस संघर्ष का क्या असर पड़ा है?
ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे इस युद्ध की आंच अब खाड़ी के दूसरे देशों तक पहुँचने लगी है। प्रवासियों और खाड़ी में रह रहे भारतीयों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि कई जगहों पर व्यापार और सुरक्षा प्रभावित हो रही है। पिछले 24 घंटों में हुई घटनाओं का विवरण नीचे दिया गया है:
| देश/क्षेत्र | प्रमुख घटना (31 मार्च 2026) |
|---|---|
| कुवैत (Kuwait) | ड्रोन हमले में पानी के प्लांट को नुकसान पहुँचा और एक कर्मचारी की मौत हुई। |
| दुबई (Dubai) | एक तेल टैंकर पर हमला हुआ जिससे उसमें आग लग गई, हालांकि बाद में आग बुझा ली गई। |
| सऊदी अरब (Saudi Arabia) | अमीर सुल्तान एयर बेस पर ड्रोन हमले की कोशिश की गई। |
| तुर्की (Turkey) | ईरानी मिसाइल को तुर्की की हवाई सीमा में घुसते ही नाटो डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। |
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और इसे अनुचित बताया है। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने साफ किया है कि युद्ध खत्म करने का कोई भी फैसला देश की सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। इस पूरे माहौल से खाड़ी देशों में काम कर रहे प्रवासियों और अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है।




