इस्राइल की सेना ने ईरान के इस्फहान शहर में स्थित एक अहम सैन्य ठिकाने पर हमला किया है। यह हमला ईरान के उस रिसर्च सेंटर पर हुआ है जो पनडुब्बियों और समुद्री तकनीक के विकास के लिए जिम्मेदार है। सऊदी मीडिया और इस्राइली सैन्य सूत्रों ने 25 मार्च 2026 को इस सैन्य कार्रवाई की जानकारी साझा की है। इस हमले का मुख्य मकसद ईरान की नौसेना की बढ़ती ताकत और उसकी रिसर्च क्षमता को चोट पहुंचाना बताया जा रहा है।
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इस सैन्य सेंटर पर हमले की क्या थी मुख्य वजह?
इस्राइली सेना यानी IDF ने इस हमले को लेकर कुछ जरूरी सैन्य जानकारियां साझा की हैं। IDF के अनुसार यह इस्फहान में ईरान का एकमात्र ऐसा संस्थान है जहां आधुनिक पनडुब्बियों का डिजाइन और विकास किया जाता था। नौसेना की खुफिया रिपोर्ट के आधार पर इस ठिकाने को खास तौर पर चुना गया क्योंकि यहां ईरानी नौसेना के लिए सहायक सिस्टम और मानवरहित समुद्री जहाजों का निर्माण भी चल रहा था। इस्राइल का मानना है कि इस केंद्र को तबाह करने से ईरान की समुद्री युद्ध क्षमता पर गहरा असर पड़ेगा। यह कार्रवाई ईरान के अलग-अलग सैन्य उत्पादन केंद्रों पर किए जा रहे हमलों की एक बड़ी योजना का हिस्सा मानी जा रही है।
ईरान में हमलों के बाद अब कैसी है स्थिति?
ईरान के सरकारी विभागों ने इन हमलों के बाद काफी नुकसान होने की बात कही है। ईरान की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि हालिया तनाव के दौरान देश के कई हिस्सों में सरकारी संपत्तियों और शिक्षा केंद्रों को नुकसान पहुंचा है। पिछले 24 घंटों के भीतर इस्राइल ने ईरान के कई सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है। जवाब में ईरान ने भी इस्राइल और आसपास के कुछ खाड़ी क्षेत्रों की ओर मिसाइलें दागकर जवाबी कार्रवाई की है। इस तनावपूर्ण स्थिति का असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है।
