लेबनान के दक्षिणी हिस्से में इसराइल ने फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। 30 अप्रैल को हुए इन हमलों में कम से कम 9 लोगों की जान गई है। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका की मदद से सीजफायर की समय सीमा बढ़ाई गई थी। इस हिंसा के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया है।
लेबनान में हमले का क्या असर हुआ और कितने लोग मारे गए?
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, गुरुवार सुबह से हुए हमलों में 9 लोग मारे गए जिनमें 2 बच्चे और 5 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा 23 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 8 बच्चे और 7 महिलाएं हैं। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी (NNA) ने बताया कि राष्ट्रपति जोसेफ औन और स्पीकर नबीह बेरी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है। लेबनान के अधिकारियों का अनुमान है कि मार्च की शुरुआत से अब तक वहां करीब 62,000 घर टूट चुके हैं या उन्हें भारी नुकसान पहुँचा है।
सीजफायर पर इसराइल और अमेरिका का क्या स्टैंड है?
इस विवाद पर अलग-अलग बयान सामने आए हैं। इसराइल के IDF चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने कहा कि जमीन पर कोई सीजफायर नहीं है और हिजबुल्लाह के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेंगे। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइल को ‘सर्जिकल’ हमले करने की सलाह दी ताकि पूरी तरह युद्ध न छिड़े। अमेरिका के एक अधिकारी ने सीजफायर के टूटने से इनकार किया है और कहा कि हिजबुल्लाह इस समझौते को बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।
हिजबुल्लाह का हमला और इसराइल की अगली योजना क्या है?
हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उन्होंने एक ड्रोन के जरिए इसराइल की 155 mm आर्टिलरी गन को निशाना बनाया और उसे तबाह कर दिया। दूसरी ओर, इसराइल अब सीमा पर 10 किलोमीटर चौड़ा बफर जोन बनाने की तैयारी कर रहा है। इसराइल लेबनान के लोगों को टेक्स्ट मैसेज और सोशल मीडिया के जरिए इलाके खाली करने की चेतावनी दे रहा है। वह अमेरिका के साथ बातचीत के लिए दो से तीन हफ्ते का समय मांग रहा है, जिसके बाद वह अपने सैन्य अभियान को और बढ़ा सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सीजफायर की समय सीमा कब बढ़ाई गई थी
शुरुआती सीजफायर 16 और 17 अप्रैल 2026 के बीच लागू हुआ था, जिसे बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 या 24 अप्रैल को तीन हफ्ते के लिए बढ़ा दिया था।
लेबनान के राष्ट्रपति ने क्या मांग की है
राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसराइल के हमलों को रोकने और नागरिकों व कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुए अपराधों की जांच करने की मांग की है।