इज़राइली सेना (IDF) ने 29 मार्च 2026 को ऐलान किया है कि उसने ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य इलाकों में हमलों का एक नया दौर पूरा कर लिया है। शनिवार और रविवार को हुए इन हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया। तेहरान में शनिवार रात और रविवार सुबह तेज़ धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं, जिससे इलाके में डर का माहौल है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुँच गया है और खाड़ी देशों पर भी इसका असर दिखने लगा है।

इज़राइली हमलों में किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?

इज़राइली सेना ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि इस ऑपरेशन का मकसद ईरान की सैन्य शक्ति को कमज़ोर करना था। हमलों में उन जगहों को चुना गया जहाँ से इज़राइल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की योजना बनाई जा रही थी।

  • ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल बनाने और उन्हें रखने वाले बड़े गोदाम।
  • सेना के अस्थाई कमांड सेंटर और मोबाइल यूनिट्स।
  • हवाई सुरक्षा प्रणालियाँ और निगरानी रखने वाली चौकियाँ।
  • नौसेना के हथियारों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक रिसर्च सेंटर।
  • होरमुज़ जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी बंदरगाह का घाट, जहाँ पाँच लोगों की जान गई।

खाड़ी देशों और अन्य क्षेत्रों पर क्या हुआ असर?

इस संघर्ष का असर अब ईरान की सीमाओं से बाहर निकलकर पड़ोसी खाड़ी देशों तक भी पहुँच गया है। बहरीन और ओमान जैसे देशों ने अपने यहाँ हुए हमलों और सुरक्षा उल्लंघनों की जानकारी दी है। खाड़ी में रहने वाले भारतीयों और प्रवासियों के लिए भी यह समय सतर्क रहने का है क्योंकि हवाई यातायात और सुरक्षा नियमों में बदलाव हो सकते हैं।

देश/संगठन घटना का विवरण
Bahrain Aluminium Bahrain (Alba) की कंपनी पर हमला हुआ, जिसमें दो कर्मचारी घायल हुए।
Oman ओमान के विदेश मंत्रालय ने अपने क्षेत्र में हुए हमलों की निंदा की और जाँच शुरू की है।
Yemen हूती विद्रोहियों ने इज़राइल पर मिसाइल दागी, जिसे बीच में ही मार गिराया गया।
Lebanon इज़राइली हमले में दक्षिणी लेबनान में 3 पत्रकार और 9 स्वास्थ्य कर्मियों की मौत हुई।
United States अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि सैन्य अभियान कुछ हफ्तों में खत्म हो सकता है, पर नए सैनिक तैनात किए गए हैं।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है और बहरीन व संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में एल्युमीनियम प्लांट पर हमले का दावा किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री तनाव कम करने के लिए बातचीत की कोशिशों में जुटे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी में काम करने वाले लाखों प्रवासियों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है।