गज़ा में सीज़फायर समझौते के बावजूद मानवीय संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। 10 अक्टूबर 2025 को लागू हुए युद्धविराम के बाद भी इज़राइली अधिकारियों पर जीवनरक्षक दवाओं और मानवीय सहायता को रोकने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। मेडिकल एड फॉर फिलिस्तीन (MAP) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ताजा रिपोर्ट में बताया है कि गज़ा में बुनियादी दवाओं का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है और लोग इलाज के लिए तरस रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि पाबंदियों के कारण गज़ा में मदद पहुंचाना अब नामुमकिन सा हो गया है।

गज़ा में मेडिकल और मानवीय मदद की क्या है ताज़ा स्थिति?

मानवीय सहायता पहुंचाने वाले संगठनों ने बताया है कि गज़ा में हालात बहुत ही चिंताजनक बने हुए हैं। वहां की वर्तमान स्थिति को नीचे दिए गए पॉइंट्स से समझा जा सकता है:

  • MAP के मुताबिक अस्पतालों में 53 प्रतिशत से ज्यादा जरूरी दवाओं का स्टॉक पूरी तरह खत्म यानी जीरो हो चुका है।
  • Doctors Without Borders (MSF) ने बताया कि 1 जनवरी 2026 से वे गज़ा में कोई भी सप्लाई नहीं ले जा पाए हैं।
  • अस्पतालों में पुराने रोगों और गंभीर बीमारियों की दवाओं की भारी कमी हो गई है।
  • यूएन एजेंसी OCHA ने जानकारी दी है कि इज़राइली रुकावटों की वजह से मार्च 2026 में कमर्शियल सप्लाई में भारी गिरावट आई है।
  • सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट के मुताबिक सीज़फायर के बाद से रोजाना औसतन दो बच्चे मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं।

सीज़फायर के बावजूद क्यों आ रही हैं ये मुश्किलें?

युद्धविराम के समझौते के बाद भी ज़मीनी हकीकत नहीं बदली है। इज़राइल ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं (NGOs) के लिए नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों की वजह से कई संगठनों को अपना काम बंद करना पड़ा है।

  • 37 संगठनों पर पाबंदी
  • नियम/घटनाक्रम असर और जानकारी
    सरकारी प्रस्ताव 2542 NGOs को स्टाफ और फंडिंग की पूरी जानकारी देना अनिवार्य किया गया।
    नियम न मानने पर केयर इंटरनेशनल और नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल जैसे 37 संगठनों पर बैन लगाया गया।
    सीज़फायर उल्लंघन 10 अक्टूबर 2025 से अब तक 2,000 से ज्यादा बार नियमों का उल्लंघन हुआ है।
    ताजा हमले युद्धविराम के दौरान हुए हमलों में 730 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं।

    9 अप्रैल 2026 को जारी एक स्कोरकार्ड के मुताबिक सीज़फायर प्लान फेल होता दिख रहा है। मानवीय संस्थाओं का कहना है कि इज़राइल सुरक्षा के नाम पर मदद रोक रहा है, जिससे आम लोगों की जान जा रही है। वहीं एनेरा (Anera) जैसे संगठनों ने बताया है कि फ्यूल की कमी और कुपोषण के कारण गज़ा में स्थिति बेकाबू होती जा रही है।

    Nura Basta

    Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.