इस्तांबुल में हुई एक बड़ी मीटिंग में अरब पार्लियामेंट के प्रेसिडेंट मोहम्मद बिन अहमद अल यमाही ने इसराइल के एक कानून के खिलाफ आवाज उठाई है. उन्होंने दुनिया भर के देशों से अपील की है कि वे फिलिस्तीनी कैदियों को दी जाने वाली फांसी के खिलाफ खड़े हों. अल यमाही ने कहा कि इस कानून को रोकना अब बहुत जरूरी हो गया है ताकि मानवाधिकारों की रक्षा की जा सके.

आखिर इसराइल का नया कानून क्या है?

इसराइल ने एक ऐसा कानून बनाया है जिसमें फिलिस्तीनी कैदियों को फांसी दी जा सकती है. यह सजा उन लोगों को मिलेगी जिन्हें इसराइली सैनिकों या आम नागरिकों की हत्या के आरोप में दोषी पाया जाएगा. इस नियम में सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें माफ़ी का कोई विकल्प नहीं है और फैसला आने के 90 दिनों के अंदर फांसी देनी होगी. इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया जा रहा है.

अरब पार्लियामेंट ने दुनिया से क्या मांग की?

मोहम्मद बिन अहमद अल यमाही ने NAM PN से कहा कि वे इस कानून के खिलाफ एक कड़ा प्रस्ताव पास करें. उन्होंने मांग की है कि दुनिया भर के देश एक साथ आएं ताकि इस कानून को लागू होने से रोका जा सके. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इसराइल की सदस्यता को इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों से सस्पेंड कर देना चाहिए क्योंकि यह कानून पूरी तरह गलत है.

संस्था/व्यक्ति मुख्य बात या मांग
मोहम्मद बिन अहमद अल यमाही कानून के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की अपील की
NAM PN इसराइल के कानून की निंदा करने वाला प्रस्ताव लाना
इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन इसराइल की सदस्यता निलंबित करने की मांग
संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप की जरूरत
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.