West Bank में इसराइल ने गिराया फिलिस्तीनी घर, बिना परमिट का दिया हवाला, HRW ने जताई चिंता
इसराइल की सेना ने वेस्ट बैंक में एक फिलिस्तीनी परिवार के घर को जमींदोज कर दिया है। इस कार्रवाई के लिए अधिकारियों ने परमिट न होने की बात कही है। Human Rights Watch जैसी संस्थाओं का कहना है कि इस तरह घर गिराने और लोगों को जबरन हटाने की घटनाएं अब काफी बढ़ गई हैं।
परमिट मिलने में कितनी मुश्किल है
इसराइली अधिकारी दावा करते हैं कि जो घर बिना परमिट के बने हैं, उन्हें गिराया जा रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि फिलिस्तीनियों के लिए परमिट पाना लगभग नामुमकिन है। डेटा के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से सितंबर 2025 के बीच 282 आवेदन दिए गए थे, जिनमें से एक को भी मंजूरी नहीं मिली। इलाके का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पूरी तरह इसराइल के कंट्रोल में है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का क्या कहना है
Human Rights Watch ने चेतावनी दी है कि 2026 में हमलों और बेदखली की संख्या पिछले साल के रिकॉर्ड को पार कर सकती है। Norwegian Refugee Council ने इसे जमीन हड़पने की एक सोची-समझी नीति बताया है। वहीं, International Court of Justice ने जुलाई 2024 में ही इसराइल के कब्जे को गैरकानूनी बताया था और वहां से बसने वालों को हटाने का आदेश दिया था।
नुकसान और विस्थापन का विवरण
| समय सीमा | गिराए गए घर/स्ट्रक्चर | बेघर हुए लोग |
|---|---|---|
| 2024 से सितंबर 2025 | 2,577 | करीब 8,000 |
| जनवरी से मार्च 2026 | – | 1,697 |
UN की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही जितने लोग विस्थापित हुए, वह संख्या 2025 के पूरे साल के आंकड़ों से ज्यादा है। डिफेंस फॉर चिल्ड्रन पलास्टाइन ने इन कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध बताया है।