इसराइल ने एक हफ्ते की हिरासत के बाद फ्लोटिला एक्टिविस्ट सैफ अबू केशेक और थियागो अवीला को ग्रीस डिपोर्ट कर दिया है। ये दोनों लोग गाजा की नाकाबंदी तोड़ने के लिए एक मानवीय मिशन पर निकले थे। एथेंस पहुँचने के बाद सैफ ने एक संदेश जारी किया है जिसमें उन्होंने समर्थकों से फिलिस्तीन के लिए अपनी आवाज़ बुलंद रखने को कहा है।
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कौन हैं ये एक्टिविस्ट और उन्हें क्यों पकड़ा गया था?
सैफ अबू केशेक स्पेन के नागरिक हैं और फिलिस्तीनी मूल के हैं, जबकि थियागो अवीला ब्राजील से हैं। ये दोनों ‘ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ नाम के एक मिशन का हिस्सा थे, जिसका मकसद गाजा में मानवीय मदद पहुँचाना था। 29-30 अप्रैल 2026 के आसपास ग्रीस के तट के पास अंतरराष्ट्रीय पानी में इसराइल की नौसेना ने इस मिशन को रोक लिया था। कई एक्टिविस्ट्स को क्रेट द्वीप पर छोड़ दिया गया, लेकिन सैफ और थियागो को पूछताछ के लिए इसराइल ले जाया गया था।
इसराइल के आरोप और मानवाधिकार ग्रुप का दावा क्या है?
- इसराइल का पक्ष: इसराइल के विदेश मंत्रालय ने इन दोनों को “प्रोफेशनल उकसाने वाले” बताया। उन पर आतंकवादी संगठनों से संबंध होने का शक जताया गया था। मंत्रालय ने कहा कि इसराइल गाजा की कानूनी समुद्री नाकाबंदी में कोई भी सेंध नहीं लगने देगा।
- अदालाह (Adalah) का दावा: एक्टिविस्ट्स की कानूनी मदद कर रहे ग्रुप अदालाह ने कहा कि उनकी हिरासत गैरकानूनी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें बहुत कठिन परिस्थितियों में रखा गया।
- अंतरराष्ट्रीय दबाव: स्पेन, ब्राजील और संयुक्त राष्ट्र ने इन दोनों की रिहाई की मांग की थी। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने इसराइल पर विदेशी नागरिकों के अपहरण और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सैफ अबू केशेक और थियागो अवीला को कब रिहा किया गया?
इन्हें 10 मई 2026 को इसराइल की हिरासत से रिहा कर ग्रीस डिपोर्ट किया गया।
ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला का क्या उद्देश्य था?
यह एक मानवीय सहायता मिशन था जिसका उद्देश्य गाजा की इसराइली समुद्री नाकाबंदी को तोड़कर मदद पहुँचाना था।
