इसराइल और लेबनान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। इसराइली सेना ने दावा किया है कि उन्होंने दक्षिण लेबनान में ह़ेज़बोला के 1,000 से ज़्यादा ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। इन ठिकानों में ऐसी इमारतें शामिल थीं जिनमें बम लगाए गए थे और भारी मात्रा में हथियार छिपाकर रखे गए थे।

इसराइल ने ह़ेज़बोला के किन ठिकानों को निशाना बनाया?

IDF (Israeli Defense Forces) के मुताबिक उनके 91वें डिवीजन के सैनिकों ने इन ठिकानों को खत्म किया है। सेना ने कुछ वीडियो भी जारी किए हैं जिनमें बच्चों के बेडरूम और खिलौनों के बीच रॉकेट, राइफल, ग्रेनेड और मशीन गन जैसे हथियार मिले हैं। इसराइल का कहना है कि ह़ेज़बोला आम नागरिकों का इस्तेमाल अपनी ढाल के तौर पर कर रहा है। इसराइल ने मंगलवार सुबह और सोमवार को दक्षिण लेबनान और पूर्वी बेका क्षेत्र में भी हवाई हमले किए थे।

ह़ेज़बोला का क्या कहना है और क्या हो रहे हैं हमले?

ह़ेज़बोला ने इसराइल के दावों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि वे इसराइल द्वारा युद्धविराम (ceasefire) के नियमों को तोड़ने और घरों को गिराने के जवाब में हमले कर रहे हैं। ह़ेज़बोला ने दावा किया कि उन्होंने इसराइली टैंकों और बुलडोजर पर ड्रोन हमले किए हैं। वहीं, इसराइल ने बताया कि एक ड्रोन हमले में उनका एक सैनिक मारा गया और छह घायल हुए हैं। ह़ेज़बोला ने साफ किया है कि वे अपने हथियार नहीं छोड़ेंगे और इसराइल को लेबनान की जमीन छोड़नी होगी।

युद्धविराम और राजनीतिक हालात क्या हैं?

अमेरिका की मदद से 17 अप्रैल 2026 को एक युद्धविराम शुरू हुआ था जिसे बाद में तीन हफ्ते के लिए बढ़ाया गया। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने ह़ेज़बोला पर देश को युद्ध में झोंकने का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ ह़ेज़बोला प्रमुख नइम कासिम ने इसराइल के साथ सीधे तौर पर बातचीत करने से साफ मना कर दिया है। लेबनान के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2 मार्च 2026 से अब तक 2,500 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 16 लाख लोग विस्थापित हुए हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

इसराइल ने लेबनान में क्या दावा किया है?

इसराइल का दावा है कि उन्होंने दक्षिण लेबनान में ह़ेज़बोला के 1,000 से ज़्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर और हथियारों के ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

लेबनान में अब तक कितने लोग प्रभावित हुए हैं?

लेबनान सरकार के मुताबिक 2 मार्च 2026 से अब तक 2,500 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 16 लाख लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं।