दक्षिण लेबनान के देबेल गांव में इसराइली सेना ने सोलर पैनल और पानी के स्टेशन को तबाह कर दिया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद Amnesty International ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। मानवाधिकार संगठन ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए इसे युद्ध अपराध की श्रेणी में रखकर जांच की मांग की है।
लेबनान में क्या हुआ और Amnesty International ने क्या कहा?
Amnesty International ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को एक बयान जारी कर इसराइल की इस हरकत की निंदा की। संगठन ने बताया कि देबेल गांव में इसराइली सेना के बुलडोजर सोलर पैनल और पानी की स्टेशन को नष्ट करते दिखे। संगठन की सीनियर डायरेक्टर Erika Guevara Rosas ने कहा कि जब कोई सैन्य जरूरत न हो, तब नागरिक संपत्तियों को नष्ट करना युद्ध अपराध के दायरे में आता है। उन्होंने इसराइल से मांग की है कि वह ऐसी हरकतें बंद करे और प्रभावित लोगों को मुआवजा दे।
इसराइली सेना का क्या जवाब है और पहले क्या हुआ था?
इसराइली सेना ने शनिवार, 25 अप्रैल 2026 को कहा कि वह इस मामले की जांच कर रही है। यह पहली बार नहीं है जब देबेल गांव में ऐसी घटना हुई हो, इससे पहले अप्रैल 2026 में ही एक इसराइली सैनिक ने वहां ईसा मसीह की मूर्ति तोड़ी थी। Amnesty International के आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2024 से 26 जनवरी 2025 के बीच दक्षिण लेबनान में 10,000 से ज्यादा इमारतों और ढांचों को भारी नुकसान पहुंचाया गया या पूरी तरह तबाह कर दिया गया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Amnesty International ने इसराइल से क्या मांग की है?
संगठन ने मांग की है कि इसराइल नागरिक संपत्ति को नष्ट करना बंद करे, नुकसान की भरपाई करे और युद्ध अपराधों की उचित जांच शुरू करे।
लेबनान में कुल कितनी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है?
Amnesty International की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2024 से 26 जनवरी 2025 के बीच दक्षिण लेबनान में 10,000 से ज्यादा ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा या नष्ट किया गया।