इजराइल का बड़ा कदम, वेस्ट बैंक में 1200 से ज्यादा नए घरों के निर्माण का ऐलान, दुनिया भर में विरोध शुरू

इजराइल सरकार ने एक बार फिर से विवादित ई-1 सेटलमेंट प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत अधिकृत वेस्ट बैंक में 1,200 से ज्यादा नए आवास इकाइयों के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह टेंडर 18 अगस्त 2026 को जारी किया गया था, जिसमें आवेदन भेजने की आखिरी तारीख इजराइल में होने वाले आगामी आम चुनाव से ठीक कुछ दिन पहले यानी 27 अक्टूबर 2026 तय की गई है। इस फैसले के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है और कई देशों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
ई-1 एरिया का भौगोलिक महत्व और विवाद
यह पूरा विवादित ई-1 क्षेत्र लगभग 12 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य माले अदूमिन बस्ती को पूर्वी यरुशलम से जोड़ना है। विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इस योजना के पूरा होने से वेस्ट बैंक का इलाका दो हिस्सों में बंट जाएगा। इससे भविष्य में एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश के गठन की संभावना पूरी तरह से खत्म हो जाएगी और भौगोलिक रूप से यह एक बड़ा संकट बन जाएगा। स्थानीय स्तर पर फिलिस्तीनी अधिकारी और नेता लगातार इसे अपनी संप्रभुता के लिए बहुत बड़ा खतरा बता रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया और प्रतिबंधों की चेतावनी
इजराइल के इस कदम के बाद दुनिया भर के कई देशों ने मिलकर इसका कड़ा विरोध किया है। 20 अगस्त 2026 को यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूरोपीय आयोग, नीदरलैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कई अन्य देशों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में साफ कहा गया कि यह योजना अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने इस प्रोजेक्ट को एक विनाशकारी कदम बताया और इस विस्तार में मदद करने वाले लोगों के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों समेत कई कड़े कदम उठाने की बात कही। इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए आप यूके सरकार की आधिकारिक घोषणा देख सकते हैं।
इसके अलावा, यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि ने भी एक औपचारिक बयान जारी करते हुए इस टेंडर को तुरंत वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले टू-स्टेट सॉल्यूशन यानी दो-राज्य समाधान के रास्ते में बहुत बड़ी रुकावट पैदा करते हैं। इस बारे में अधिक जानकारी रिलीफवेब की रिपोर्ट में दी गई है।
इजराइल के भीतर राजनीतिक बयानबाजी तेज
इजराइल की राजनीति में इस प्रोजेक्ट का इस्तेमाल चुनावी फायदे के लिए किया जा रहा है। देश के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच, जो फिलिस्तीनी राष्ट्र बनने की संभावना को खत्म करने की बात खुलेआम कहते रहे हैं, इस विकास कार्य के मुख्य समर्थकों में शामिल हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अन्य दक्षिणपंथी नेता आगामी चुनावों से पहले घरेलू वोट बैंक को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय विरोध का राजनीतिक फायदा उठा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय यानी आईसीजे की 19 जुलाई 2024 की सलाहकार राय में इन बस्तियों को अवैध बताया गया था, लेकिन इसके बावजूद इजराइल के विदेश मंत्री गिड़ियन सार ने वैश्विक आलोचना को खारिज करते हुए कहा है कि यहूदी जनता को इजराइल की भूमि पर रहने का पूरा हक है।
संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय नेताओं की चेतावनी
फिलिस्तीनी नेशनल काउंसिल के अध्यक्ष रावी फत्तौह और नेता मुस्तफा बारघौटी ने चेतावनी दी है कि यह प्रोजेक्ट उनकी पहचान और अस्तित्व पर सीधा हमला है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इन चिंताओं पर अपनी बात रखते हुए यूएन सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 के तहत इस विस्तार को तुरंत रोकने की अपील की है। तनाव के इस माहौल के बीच स्थानीय रिपोर्टों में वेस्ट बैंक में एक फिलिस्तीनी बच्चे की मौत की खबर भी सामने आई है, जिससे वहां हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।