इजराइल में राजनीतिक और सुरक्षा संकट के बीच पिछले तीन सालों में करीब 2.70 लाख लोगों ने छोड़ा देश।

Nura Basta20 August 20263 min read54 viewsWorld
इजराइल में राजनीतिक और सुरक्षा संकट के बीच पिछले तीन सालों में करीब 2.70 लाख लोगों ने छोड़ा देश।

इजराइल में लगातार जारी राजनीतिक अनिश्चितता और सुरक्षा के गंभीर खतरों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तेल अवीव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इजराइली सेंट्रल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (CBS) के आंकड़ों का अध्ययन करके बताया है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान लगभग 268,509 इजराइली नागरिकों ने अपना देश छोड़ दिया है। इस अध्ययन में देश छोड़ने का मतलब कम से कम तीन लगातार महीनों तक देश से बाहर रहना बताया गया है।

साल दर साल बढ़ते गए आंकड़े और पिछले आंकड़ों से तुलना

शोध के अनुसार साल 2023 में लगभग 86,509 लोगों ने इजराइल छोड़ा था। इसके बाद साल 2024 में यह संख्या बढ़कर 91,499 हो गई और साल 2025 में लगभग 90,922 नागरिकों ने देश से पलायन किया। अगर इन आंकड़ों की तुलना साल 2010 से 2019 के बीच के समय से की जाए, तो पता चलता है कि उन दस सालों में हर साल औसतन करीब 60,000 लोग ही देश छोड़कर जाते थे। हालिया सालों में यह संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है, जिसे लेकर आम लोगों और विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

पलायन के मुख्य कारण और समाज पर असर

इस पूरे मामले पर शोध करने वाले प्रोफेसर इताइ एटर, प्रोफेसर नित्तई बर्गमैन और पीएचडी के छात्र डोरोन ज़मीर ने बताया कि देश छोड़ने के पीछे मुख्य वजहें लगातार बने हुए सुरक्षा संबंधी डर और राजनीतिक अस्थिरता हैं। आलोचकों का मानना है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार की नीतियां, साल 2023 के न्यायिक सुधार के प्रयास और नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामर बेन-गविर् जैसे कट्टरपंथियों का प्रभाव देश में आपसी विभाजन को बढ़ा रहा है। इसके अलावा इजराइली टैक्स अथॉरिटी की एक अन्य रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि जो लोग देश छोड़कर जा रहे हैं, उनमें ज्यादातर धनी और ज्यादा पढ़े-लिखे लोग शामिल हैं।

केनेसैत में हुई खास बैठक और डेमोग्राफिक बदलाव

इस पूरी स्थिति को लेकर बीते 16 जून 2026 को एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में केनेसैत की कमेटी फॉर इम्यूग्रेशन, एब्जॉर्प्शन एंड डायस्पोरा अफेयर्स और स्पेशल कमेटी ऑन यंग इजराइज ने मिलकर केनेसैत रिसर्च एंड इसफॉर्मेशन सेंटर की एक रिपोर्ट पर चर्चा की। इस चर्चा के दौरान सांसदों ने देश छोड़ने वाले लोगों के डेमोग्राफिक असर पर चिंता जताई। सांसद नामा लाजिमी ने जानकारी दी कि देश छोड़ने वालों में से 67% लोग 40 साल से कम उम्र के युवा हैं। इस युवा वर्ग में बड़ी संख्या में मेडिकल प्रोफेशनल्स यानी डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं, जिनका बाहर जाना देश के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

इजराइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट की पुरानी रिपोर्ट

इससे पहले इजराइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट ने नवंबर 2025 में अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि देश की कुल आबादी का 25% से ज्यादा हिस्सा विदेश में बसने के बारे में सोच रहा है। इस बड़े रुझान को विशेषज्ञों ने पलायन की एक संभावित सुनामी करार दिया है। इस पूरी जानकारी के बारे में विस्तार से Knesset Official Website पर जारी प्रेस विज्ञप्ति में पढ़ा जा सकता है, जहां सरकार और संसद स्तर पर इन सभी आंकड़ों की समीक्षा की गई है।

Share:

Comments

Leave a comment