Israel ने Somaliland में नियुक्त किया Envoy, Saudi और कई इस्लामिक देशों ने जताया कड़ा विरोध, कहा- Somalia की एकता के साथ खिलवाड़
इसराइल ने Somaliland में अपने पहले राजनयिक दूत की नियुक्ति की है, जिससे दुनिया भर के इस्लामिक और अरब देशों में हंगामा मच गया है। सऊदी अरब और मिस्र समेत कई देशों ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यह फैसला Somalia की एकता और उसकी सरहदों का सीधा उल्लंघन है।
विरोध करने वाले मुख्य देश कौन हैं?
सऊदी अरब और कई अन्य देशों ने एक साझा बयान जारी कर इसराइल के फैसले को गलत बताया। इन देशों ने कहा कि वे Somalia की एकता और वहां की चुनी हुई सरकार का पूरा समर्थन करते हैं। विरोध करने वाले देशों की सूची नीचे दी गई है:
| देश का नाम |
|---|
| सऊदी अरब |
| मिस्र |
| सोमालिया |
| पाकिस्तान |
| सूडान |
| लीबिया |
| बांग्लादेश |
| अल्जीरिया |
| फिलिस्तीन |
| इंडोनेशिया |
| तुर्की |
| कुवैत |
| मॉरिटानिया |
| जॉर्डन |
| ओमान |
| लेबनान |
इसराइल ने क्या कदम उठाया और Somaliland ने क्या कहा?
इसराइल ने 15 अप्रैल 2026 को Michael Lotem को Somaliland के लिए अपना पहला राजदूत नियुक्त किया। Michael Lotem इससे पहले केन्या में राजदूत और अफ्रीका के लिए आर्थिक दूत रह चुके हैं। इसराइल ने दिसंबर 2025 में ही Somaliland को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दे दी थी।
दूसरी ओर Somaliland की सरकार ने 19 अप्रैल 2026 को इस विरोध का जवाब दिया। उन्होंने इस निंदा को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें अपनी विदेश नीति चलाने का पूरा हक है। उन्होंने विरोध करने वाले देशों पर पाखंड का आरोप लगाया और कहा कि ये देश अन्य क्षेत्रीय खतरों पर चुप रहते हैं।
इस फैसले से क्या खतरा हो सकता है?
अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने चेतावनी दी कि इसराइल का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों, संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अफ्रीकी संघ के नियमों के खिलाफ है। उनका कहना है कि यह फैसला Somalia की संप्रभुता को चोट पहुँचाता है।
इन देशों का मानना है कि इस तरह के एकतरफा कदम से Horn of Africa क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर बुरा असर पड़ने का खतरा है। इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भी इस मामले में Somalia के प्रति अपना पूर्ण समर्थन जताया है।