इसराइल ने दक्षिणी लेबनान में एक ‘येलो लाइन’ बना दी है। यह एक ऐसा इलाका है जिसे नो-गो जोन घोषित किया गया है और यहाँ किसी को भी जाने की इजाजत नहीं होगी। इस फैसले से लेबनान के 55 गांवों के लोग अपने घरों से दूर रहेंगे। यह कदम बिल्कुल वैसा ही है जैसा इसराइल ने गाजा में किया था, जिससे अब वहां जमीन कब्जे और इमारतों को गिराने का खतरा बढ़ गया है।

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लेबनान में ‘येलो लाइन’ क्या है और इसका असर क्या होगा?

इसराइल की सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में एक प्रतिबंधित क्षेत्र बनाया है जिसे ‘येलो लाइन’ कहा जा रहा है। इस लाइन के अंदर आने वाले 55 गांवों में अब आम निवासियों का जाना मना है। IDF अधिकारियों ने पुष्टि की है कि लोग इन गांवों में वापस नहीं लौट सकेंगे। इसराइल ने साफ किया है कि वह गाजा वाले मॉडल को ही लेबनान में लागू कर रहा है और सीज़फायर के दौरान भी आतंकी ढांचों को नष्ट करने का काम जारी रखेगा।

नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस पर क्या कहा?

इसराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने 18 अप्रैल 2026 को कहा कि सेना उन सभी जगहों पर कब्जा बनाए रखेगी जिन्हें उसने जीता है। दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह के नेता Mahmoud Qamati ने चेतावनी दी है कि यह समझौता अस्थायी है और उनके लड़ाके किसी भी उल्लंघन का जवाब देने के लिए तैयार हैं। लेबनानी सेना ने भी लोगों को सलाह दी है कि जब तक स्थिति साफ न हो, वे दक्षिण लेबनान लौटने में जल्दबाजी न करें। UN स्पेशल कमेटी ने कहा है कि निजी संपत्ति को नष्ट करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।

विवरण जानकारी
घटना की तारीख़ 19 अप्रैल, 2026
प्रभावित गांव 55 लेबनानी गांव
सीज़फायर की अवधि 10 दिन (16-17 अप्रैल से शुरू)
मध्यस्थता अमेरिका (डोनाल्ड ट्रंप)
लड़ाई की शुरुआत 2 मार्च, 2026
प्रमुख प्रभाव संपत्ति का विनाश और विस्थापन
नियम का आधार गाजा मॉडल की नकल