गाज़ा में इसराइल ने एक नई ‘ऑरेंज लाइन’ (Orange Line) बना दी है जिससे वहां आने-जाने पर कड़ी पाबंदी लग गई है। इस नए नियम की वजह से आम नागरिकों और मदद पहुँचाने वाले कार्यकर्ताओं की जान को खतरा बढ़ गया है। अब गाज़ा के कई हिस्से टुकड़ों में बंट गए हैं और लोगों का हिलना-डुलना मुश्किल हो गया है।

क्या है यह ‘ऑरेंज लाइन’ और इसे क्यों बनाया गया?

इसराइल की मिलिट्री एजेंसी COGAT ने मार्च 2026 के बीच में मदद पहुँचाने वाले समूहों को नए नक्शे दिए थे। यह ‘ऑरेंज लाइन’ दरअसल उस ‘येलो लाइन’ के पास का इलाका है जहाँ से इसराइली सेना पीछे हटी थी। COGAT ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को इस इलाके में आने-जाने के लिए सेना से तालमेल करना होगा ताकि सुरक्षा बनी रहे। इसराइल का दावा है कि ये सीमाएं सुरक्षा के हिसाब से तय की जाती हैं और इससे आम लोगों पर कोई असर नहीं पड़ता है।

मदद पहुँचाने वाली संस्थाओं और लोगों पर क्या असर पड़ा?

  • इलाके का विस्तार: यह ऑरेंज लाइन गाज़ा के कुल क्षेत्रफल का करीब 11 प्रतिशत हिस्सा है। अब गाज़ा का लगभग दो-तिहाई हिस्सा इसराइल के नियंत्रण या पाबंदी के दायरे में आ गया है।
  • संस्थाओं को परेशानी: UNICEF, WHO और UNRWA जैसी बड़ी संस्थाओं के काम पर इसका बुरा असर पड़ा है। UNRWA के 10 सेंटर और शेल्टर अब इस प्रतिबंधित क्षेत्र में आ गए हैं।
  • जान का जोखिम: मार्च के बीच से अब तक इस इलाके में तीन सहायता कर्मी मारे गए हैं जिनमें UNICEF के दो और WHO का एक कर्मी शामिल है।

ज़मीनी हकीकत और लोगों का डर

गाज़ा में रहने वाले हज़ारों विस्थापित लोग अब इन प्रतिबंधित इलाकों में फंस गए हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज़मीन पर इन लाइनों का कोई निशान नहीं है, जिससे लोग उलझन में रहते हैं। कई लोगों को यह डर है कि इसराइल इस तरीके से धीरे-धीरे इलाके पर अपना परमानेंट कब्ज़ा करना चाहता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ऑरेंज लाइन से गाज़ा के कितने हिस्से पर असर पड़ा है?

ऑरेंज लाइन गाज़ा के लगभग 11 प्रतिशत हिस्से को कवर करती है। इसके कारण अब गाज़ा का करीब दो-तिहाई हिस्सा इसराइल की पाबंदी या नियंत्रण के दायरे में आ गया है।

इस नए नियम से सहायता कर्मियों को क्या खतरा है?

इस क्षेत्र में आने-जाने के लिए मिलिट्री से तालमेल करना ज़रूरी है। मार्च 2026 से अब तक UNICEF और WHO के तीन सहायता कर्मी इस इलाके में इसराइली हमलों में मारे गए हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com