गजा पट्टी में इसराइल ने अपनी मिलिट्री बाउंड्री का दायरा बढ़ा दिया है. अब इसराइल का कंट्रोल गजा के एक बड़े हिस्से पर हो गया है, जिससे वहां रहने वाले लोगों के लिए हालात बहुत मुश्किल हो गए हैं. इस बदलाव के बाद अब मानवीय मदद पहुँचाना और भी कठिन हो गया है और आम लोगों में डर का माहौल है.
गजा में इसराइल की नई सीमाओं का क्या मतलब है
- इसराइल ने चुपचाप गजा के नए नक्शे जारी किए, जिनमें हजारों विस्थापित फिलिस्तीनियों को प्रतिबंधित क्षेत्र के अंदर डाल दिया गया.
- रिपोर्ट्स के मुताबिक अब गजा के लगभग दो-तिहाई हिस्से पर इसराइल का नियंत्रण है.
- इसराइल की मिलिट्री एजेंसी COGAT ने साफ किया कि मानवीय संस्थाओं को ‘ऑरेंज लाइन’ के अंदर जाने के लिए उनके साथ तालमेल करना होगा.
- इसराइल इन इलाकों को बफर जोन कह रहा है ताकि भविष्य में हमलों को रोका जा सके.
आम लोगों और राहत संस्थाओं पर इसका क्या असर पड़ा
सीमाओं के लगातार बदलने से आम लोगों और मदद पहुँचाने वाली टीमों में भारी उलझन है. UNRWA ने बताया कि उनके 10 और सेंटर, जिनमें शरणार्थियों के शेल्टर भी शामिल हैं, अब इसराइल की नई ‘ऑरेंज लाइन’ के अंदर आ गए हैं. राहत कर्मियों का कहना है कि इन पाबंदियों की वजह से लोगों तक पानी और जरूरी सामान नहीं पहुँच पा रहा है. फिलिस्तीनी जानकारों का मानना है कि आबादी को एक छोटी सी तटीय पट्टी में सिमटाया जा रहा है, जिससे लोगों को वहां से हटने पर मजबूर होना पड़ सकता है.
इसराइल के बड़े नेताओं ने क्या बयान दिए
इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने 31 मार्च 2026 को एक वीडियो में कहा कि पट्टी के आधे से ज्यादा हिस्से पर अब उनका कंट्रोल है. वहीं, रक्षा मंत्री Israel Katz ने अप्रैल 2026 में ऐलान किया कि इसराइल गजा को कभी नहीं छोड़ेगा. उन्होंने वहां मिलिट्री और खेती से जुड़ी बस्तियां बसाने की योजना भी बताई है. हालांकि, अमेरिका ने पहले एक प्लान दिया था जिसमें इसराइल की मौजूदगी को मना किया गया था, लेकिन वह योजना फिलहाल रुकी हुई है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
इसराइल ने गजा में कौन सी नई लाइन बनाई है?
इसराइल ने ‘ऑरेंज लाइन’ और ‘येलो लाइन’ जैसी सीमाएं तय की हैं. ऑरेंज लाइन के अंदर जाने के लिए मानवीय संस्थाओं को COGAT से अनुमति और तालमेल करना पड़ता है.
क्या इसराइल गजा में अपनी बस्तियां बसाना चाहता है?
हाँ, इसराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा है कि इसराइल गजा को कभी नहीं छोड़ेगा और वहां मिलिट्री-एग्रीकल्चरल सेटलमेंट्स बनाने की योजना है.