गाज़ा में हालात और मुश्किल होते जा रहे हैं। इसराइल ने वहां ‘ऑरेंज लाइन’ नाम के एक प्रतिबंधित क्षेत्र को और बड़ा कर दिया है। इस फैसले की वजह से अब आम नागरिकों और मदद पहुंचाने वाले कार्यकर्ताओं के लिए आवाजाही करना बहुत कठिन हो गया है। इसराइल का दावा है कि इससे मदद के काम में तालमेल बेहतर होगा, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है।

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‘ऑरेंज लाइन’ ज़ोन क्या है और इसे क्यों बढ़ाया गया?

Israeli Defense Forces (IDF) ने 2 मई 2026 को इस क्षेत्र को बढ़ाने का ऐलान किया। इसराइल की सैन्य एजेंसी COGAT ने बताया कि ‘ऑरेंज लाइन’ उन इलाकों को अलग करता है जहाँ दुश्मन की गतिविधियाँ हो सकती हैं। इस वजह से कई रिहायशी इलाकों को अब ‘नो-गो ज़ोन’ यानी प्रतिबंधित क्षेत्र बना दिया गया है। COGAT का कहना है कि मानवीय संगठनों को यहाँ आने-जाने के लिए सेना से पहले तालमेल करना होगा ताकि सुरक्षा बनी रहे, हालांकि उनका दावा है कि आम नागरिक इससे प्रभावित नहीं हुए हैं।

इस फैसले का आम लोगों और मदद एजेंसियों पर क्या असर पड़ा है?

  • ज़मीन का नुकसान: फिलिस्तीनी सूत्रों के मुताबिक, इसराइल का नियंत्रण अब गाज़ा के 60% से ज़्यादा हिस्से पर हो गया है। अब वहां के लोगों के लिए रहने की जगह घटकर सिर्फ 38% रह गई है।
  • मदद में देरी: कई सहायता काफिलों को रास्ते बदलने पड़े हैं या वे देरी से पहुँच रहे हैं क्योंकि तालमेल की सही व्यवस्था नहीं है।
  • UN की चिंता: संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रवक्ता Stéphane Dujarric ने कहा कि यह कदम अक्टूबर 2025 के युद्धविराम समझौते के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि इन इलाकों में लड़ाई का खतरा ज़्यादा है और यहाँ जाने वाली टीमों को इसराइली अधिकारियों से पहले अनुमति लेनी होगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ऑरेंज लाइन ज़ोन से गाज़ा की ज़मीन पर क्या असर पड़ा है?

इसराइल के नियंत्रण में अब गाज़ा का 60% से ज़्यादा हिस्सा आ गया है, जिससे फिलिस्तीनियों के लिए उपलब्ध जगह घटकर लगभग 38% रह गई है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस विस्तार को लेकर क्या कहा है?

UN ने पुष्टि की है कि यह विस्तार अक्टूबर 2025 के युद्धविराम समझौते के विपरीत है और इससे मानवीय सहायता टीमों के लिए जोखिम बढ़ गया है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com