Israel ने गाजा सपोर्ट सेंटर से डच प्रतिनिधियों को निकाला बाहर, प्रधानमंत्री नेतन्याहू का कड़ा फैसला.

इजरायली सरकार ने 25 अगस्त 2026 को एक बड़ा कदम उठाते हुए गाजा के लिए इंटरनेशनल सपोर्ट सेंटर से नीदरलैंड के प्रतिनिधियों को तुरंत प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। इस फैसले के बाद डच अधिकारियों को एक हफ्ते के भीतर इजरायल छोड़ने का निर्देश दिया गया है। इस कार्रवाई की पुष्टि देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विदेश मंत्री गिड़ोन सा'ार द्वारा संयुक्त रूप से की गई है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है।
कड़े फैसले के पीछे की मुख्य वजह
विदेश मंत्री गिड़ोन सा'ार ने नीदरलैंड के प्रतिनिधियों को हटाने का कारण देश के भीतर चल रहे भारत विरोधी या यूं कहें कि इजरायल विरोधी कदमों का पैटर्न बताया है। सा'ार ने विशेष रूप से नीदरलैंड के उस नए कानून का जिक्र किया जो 22 सितंबर से लागू होने वाला है। इस नए कानून के तहत जुडेशिया, सामरिया, पूर्वी यरूशलम और गोलान हाइट्स से आने वाले इजरायली सामानों के व्यापार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। डच सरकार का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इजरायली बस्तियां अवैध हैं और इस तरह का प्रतिबंध लगाना गैरकानूनी स्थिति में सहयोग न करने के लिए जरूरी है। विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि जो भी इजरायल के खिलाफ काम करेगा, उसे इस क्षेत्र में टिकने का कोई मौका नहीं मिलेगा और इजरायल ऐसी हर हरकत का कड़ा जवाब देगा।
गाजा सपोर्ट सेंटर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
यह सपोर्ट सेंटर जिसे सिविल-मिल्ट्री कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी CMCC भी कहा जाता है, किर्यत गत में स्थित है। इस केंद्र को अक्टूबर 2025 में एक समझौते के तहत बनाया गया था ताकि गाजा पट्टी में मानवीय सहायता और स्थिरता के कामों को सही तरीके से चलाया जा सके। इस केंद्र का नेतृत्व अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के प्रमुख ब्रैड कूपर कर रहे हैं और इसमें लगभग 20 देशों के लोग शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों को इस निष्कासन के बारे में औपचारिक रूप से जानकारी दे दी गई है और यह बात इजरायल स्थित डच दूतावास को भी बता दी गई है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
इजरायली अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है बल्कि इससे पहले भी कई ऐसी बातें हुईं जिन्होंने तनाव बढ़ाया। नीदरलैंड ने इजरायल की बस्तियों की निंदा की थी, हथियारों के निर्यात पर रोक लगाई थी और इजरायल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच तथा राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर के नीदरलैंड में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। सीएमसीसी से किसी देश के प्रतिनिधियों को निकाले जाने की यह दूसरी घटना है। इससे पहले अप्रैल 2026 में स्पेन के प्रतिनिधियों को भी इजरायल विरोधी रवैये के चलते बाहर का रास्ता दिखाया गया था। इस ताजा मामले पर 25 अगस्त 2026 तक डच अधिकारियों की तरफ से कोई भी आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया था।