ईरान और इसराइल के बीच जारी जंग में अब एक बड़ी बात सामने आई है। Al Jazeera की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की पूरी मदद मिलने के बाद भी इसराइल, ईरान को हराने में नाकाम रहा। इस वजह से इसराइल की ‘Greater Israel’ वाली रणनीति को बड़ा झटका लगा है और दुनिया के सामने उसकी कमजोरी आ गई है।

इसराइल और ईरान की जंग में क्या हुआ?

Samer Jaber ने अपनी राय में कहा कि इसराइल अकेले ईरान का सामना नहीं कर सकता। उसे अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर रहना पड़ा। इस जंग ने यह साफ कर दिया कि बिना बाहरी मदद के इसराइल की ताकत कम है। वहीं ईरान ने इस मुश्किल समय में खुद को एक बड़ी क्षेत्रीय ताकत के रूप में खड़ा किया है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत की है।

सीजफायर और पाकिस्तान की भूमिका

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान ने बीच-बचाव किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने पाकिस्तान की मदद से एक सीजफायर यानी युद्धविराम को मंजूरी दी। यह समझौता 8 अप्रैल 2026 से लागू हुआ, जिसमें मिसाइल हमलों को रोकने और समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने की बात कही गई।

नेतनयाहू और ट्रम्प का क्या कहना है?

इसराइल के पीएम बेंजामिन नेतनयाहू ने व्हाइट हाउस को फोन करके सीजफायर का विरोध किया था। उन्होंने साफ किया कि लेबनान में सेना का ऑपरेशन नहीं रुकेगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अमेरिका पर हमला किया, तो उसका जवाब बहुत सख्त होगा। इसी बीच दोनों देशों की बातचीत की टीमें दोबारा इस्लामाबाद जाने की तैयारी में हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.