इजरायली सेना का लेबनान पर बड़ा हमला, अली अल-ताहर हाइट्स को बनाया निशाना, इलाके में भारी तनाव.

दक्षिणी लेबनान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और 22 अगस्त से 23 अगस्त 2026 के बीच सैन्य कार्रवाई बहुत ज्यादा तेज हो गई है। इजरायली सेना ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले अली अल-ताहर हाइट्स पर लगातार हवाई हमले और रुक-रुक कर भारी तोपखाने से गोलाबारी की है। लेबनान की आधिकारिक राष्ट्रीय समाचार एजेंसी NNA ने इस बात की जानकारी दी है कि इन हमलों के तहत कई जगहों पर धमाके किए गए, जिनकी गूंज आसपास के हदथा इलाके तक साफ सुनाई दी। आम लोगों के लिए यह स्थिति काफी डरावनी और तनावपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि संघर्ष के दायरे में रिहायशी इलाके भी आ रहे हैं।
फास्फोरस बमों का इस्तेमाल और जासूसी विमानों की गश्त
रिपोर्ट्स के अनुसार 22 अगस्त को इस पहाड़ी के आसपास के इलाकों में फास्फोरस बमों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा शुक्रवार की रात से ही इजरायली जासूसी विमान लगातार आसमान में चक्कर काट रहे हैं और हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रहे हैं। इजरायली अधिकारी कात्ज ने इजरायली रक्षा बलों यानी IDF को दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को तेजी से नष्ट करने का सख्त आदेश दिया है। उनका यह मानना है कि अली अल-ताहर रिज सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है और इस पर नियंत्रण पाना उनके सैन्य अभियानों के लिए जरूरी है।
आम नागरिकों को भारी नुकसान और घरों का विध्वंस
चल रहे इन हमलों की वजह से लेबनान के सीमावर्ती इलाकों में आम नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। लेबनान के सुरक्षा सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि इन हमलों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है और तीन लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा 22 अगस्त को हुई अतिरिक्त बमबारी में स्रेब्बिन और स्रीफा में भी कुछ लोग घायल हो गए। लेबनानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अल-मनौरी, बिंत जबील, कफर तेबनित और अरनौण जैसे इलाकों में कई रिहायशी घरों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है, जिससे लोग बेघर हो गए हैं।
हिजबुल्लाह का सख्त रुख और अमेरिका की लाचारी
दूसरी तरफ हिजबुल्लाह के सांसद हसन इज्जेद्दीन ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका संगठन अली अल-ताहर को एक बेहद जरूरी और बुनियादी ठिकाना मानता है और वे किसी भी कीमत पर इस जगह को छोड़ने वाले नहीं हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस इलाके के भीतर एक मजबूत भूमिगत नेटवर्क और सुरंगों का परिसर बना हुआ है, जिसे इजरायली सेना या तो पूरी तरह से निशाना बना रही है या फिर सील करने की कोशिश कर रही है। हालांकि अमेरिका के नेतृत्व में इस सैन्य अभियान के दायरे को सीमित करने और नागरिकों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कूटनीतिक बातचीत जारी है, लेकिन एक अमेरिकी अधिकारी ने बेरूत को यह स्पष्ट कर दिया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका इजरायल को इस जगह पर कार्रवाई करने से रोकने में पूरी तरह असमर्थ है।
युद्धविराम समझौते के बावजूद जारी है संघर्ष
यह तमाम सैन्य टकराव उस उत्तरी सीमा पर बढ़ रहे तनाव के बीच हो रहे हैं, जहां पिछले साल 16 अप्रैल 2026 को एक संघर्षविराम समझौता हुआ था। लेकिन विडंबना यह है कि उस समझौते के बाद से ही रोजाना होने वाली हवाई और तोप से गोलाबारी के कारण उस समझौते का लगातार उल्लंघन हो रहा है। इजरायली अधिकारियों का यह कहना है कि उनकी ये तमाम कार्रवाइयां सुरक्षा आकलन और खुफिया जानकारियों के आधार पर आतंकवादी गतिविधियों के जवाब में की जा रही हैं। वे नबातिएह क्षेत्र और पूर्वी हिस्से तक अपनी पहुंच और नियंत्रण को मजबूत करने के लिए लगातार आगे बढ़ रहे हैं, जिससे इस पूरे इलाके में अमन और चैन की बहाली दूर की कौड़ी साबित हो रही है।