Israel-Hezbollah Ceasefire: 10 दिन का युद्धविराम लागू, लेकिन नेतन्याहू बोले अभी काम बाकी है, हिज़्बुल्लाह को खत्म करने का किया वादा

Israel और Lebanon के बीच 10 दिनों का युद्धविराम (ceasefire) शुरू हो गया है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की मध्यस्थता के बाद लिया गया है। दक्षिण लेबनान में लोग अपने घरों को वापस लौट रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ़ कर दिया है कि वे हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह खत्म करने के अपने मिशन को जारी रखेंगे।

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युद्धविराम के नियम और शर्तें क्या हैं?

यह युद्धविराम शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 की आधी रात से लागू हुआ है। इस समझौते के तहत Israel ने लेबनान में अपने हमले रोकने की बात कही है, लेकिन अपनी आत्मरक्षा का अधिकार सुरक्षित रखा है। प्रधानमंत्री Netanyahu ने कहा कि Israel सुरक्षा कारणों से दक्षिण लेबनान में 10 किलोमीटर का सुरक्षा ज़ोन बनाए रखेगा और वहां से अपनी सेना नहीं हटाएगा। वहीं, अमेरिका का कहना है कि Lebanon अब हिज़्बुल्लाह को खत्म करने की दिशा में काम करेगा।

दुनिया के बड़े नेताओं और संगठनों की क्या प्रतिक्रिया रही?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस ceasefire की घोषणा करते हुए Israel और Lebanon के नेताओं को व्हाइट हाउस बुलाया है। उनका मानना है कि इस दौरान हिज़्बुल्लाह अच्छे तरीके से व्यवहार करेगा। संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख António Guterres ने इस फैसले का स्वागत किया है, जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने चिंता जताई है कि जारी सैन्य गतिविधियां इस शांति समझौते को नुकसान पहुंचा सकती हैं। लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने इसे अपनी बड़ी मांग बताया है, हालांकि उन्होंने Netanyahu से सीधे बात करने से मना कर दिया।

मुख्य पक्षों का मौजूदा स्टैंड क्या है?

पक्ष मुख्य बात / स्टैंड
Benjamin Netanyahu हिज़्बुल्लाह को खत्म करने का वादा और 10km सुरक्षा ज़ोन की मांग।
Donald Trump दोनों देशों के बीच बातचीत करवाई और शांति की उम्मीद जताई।
Hezbollah सावधानी से truce का पालन करेंगे, बशर्ते Israel हमले रोके।
Joseph Aoun युद्धविराम को लेबनान की मुख्य मांग बताया।
UN (Guterres) युद्धविराम की घोषणा का स्वागत किया।
France (Macron) समझौते के टूटने की आशंका जताई।

इस बीच, बेरूत में युद्धविराम शुरू होने पर खुशियां मनाई गईं और लोग जश्न मनाने लगे। हालांकि, कुछ शुरुआती रिपोर्टों में नियमों के उल्लंघन और सैन्य गतिविधियों की खबरें भी आईं, जिससे इस शांति समझौते की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। इस truce के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का रास्ता भी खुल सकता है।