Israel और Hezbollah के बीच एक बार फिर युद्ध विराम (ceasefire) का समझौता हुआ है। रॉयटर्स न्यूज एजेंसी ने एक बड़े अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि यह समझौता शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्थानीय समय के अनुसार शाम 4 बजे से लागू होना था। इस शांति समझौते को करवाने में अमेरिका और कतर के negotiators ने अहम भूमिका निभाई और इसमें ईरान ने भी सहायता की।

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समझौते की खबर के बीच भी जमीन पर हालात काफी खराब रहे। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी और वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायल के हमलों में दक्षिणी लेबनान में 18 से 21 आम नागरिकों की जान चली गई। इसे अमेरिका और ईरान के बीच हुए पिछले समझौते के बाद का सबसे घातक हमला माना जा रहा है।

वहीं, इजरायली सेना ने दावा किया कि उन्होंने रात भर में लेबनान के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में Hezbollah के 80 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया, जिसमें कई लड़ाके मारे गए। दूसरी ओर, Hezbollah ने इजरायली टैंकों और ड्रोन से हमला किया, जिसमें इजरायल के एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत 4 सैनिक मारे गए और 5 अन्य घायल हो गए।

इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान देते हुए Israel के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि वे Hezbollah से बहुत भारी कीमत वसूलेंगे और दक्षिणी लेबनान में जब तक जरूरी होगा अपना सुरक्षा क्षेत्र (security zone) बनाए रखेंगे। IDF के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Effie Defrin ने बताया कि ceasefire लागू है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो सेना लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। इजरायल ने Hezbollah पर ceasefire के नियमों को खुलेआम तोड़ने का आरोप लगाया है।

Hezbollah के सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि वे इस समझौते का पालन करेंगे, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल पिछले दो सालों से लगातार समझौतों का उल्लंघन कर रहा है। लेबनान के राष्ट्रपति Aoun ने कहा कि इजरायल के हमलों से शांति की कोशिशों को नुकसान पहुँच रहा है और अब एक व्यापक ceasefire की जरूरत है।

इस तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखा। अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत को टाल दिया गया है, जिसमें उपराष्ट्रपति JD Vance को शामिल होना था। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक लेबनान में लड़ाई पूरी तरह नहीं रुकती, तब तक अमेरिका के साथ बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।