लेबनान में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्ध विराम (ceasefire) का समझौता तो हुआ, लेकिन धरातल पर अब भी हमले जारी हैं। अमेरिकी और ईरानी सरकार के बीच भी एक समझौता हुआ है, फिर भी लोग अपनी जान गंवा रहे हैं और हालात बिगड़ते जा रहे हैं।

ceasefire और समझौतों की जानकारी

19 जून 2026 को इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच ceasefire पर सहमति बनी थी। यह समझौता स्थानीय समय के अनुसार शाम 4 बजे से लागू होना था। इसकी पुष्टि अमेरिकी अधिकारी, हिजबुल्लाह के सूत्रों और IDF के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Effie Defrin ने की थी। इसी दिन सुबह अमेरिका और ईरान के बीच एक डिजिटल समझौता (MoU) भी साइन हुआ, जिसका मकसद सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को रोकना था।

नियमों को लेकर विवाद

समझौते के बावजूद दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने हिजबुल्लाह पर ceasefire के नियमों को तोड़ने का आरोप लगाया और अपनी सेना को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। वहीं हिजबुल्लाह ने इन आरोपों को गलत बताया और कहा कि इसराइल नवंबर 2024 से ही समझौतों का पालन नहीं कर रहा है और बुनियादी ढांचे को तबाह कर रहा है। दूसरी तरफ, अमेरिका में इसराइल के राजदूत Yechiel Leiter ने कहा कि इसराइल ने सुबह 11:30 बजे ही अपने सभी हमले रोक दिए थे।

जान-माल का नुकसान

इस लड़ाई में कई लोग मारे गए हैं। 19 जून को इसराइल के हमलों में लेबनान के कम से कम 26 लोग मारे गए, जबकि एक हमले में 4 इसराइली सैनिक मारे गए। 20 जून को भी लेबनान के दक्षिणी हिस्से में ड्रोन और हवाई हमलों में 5 और लोगों की मौत की खबर आई है। लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने इस बढ़ते तनाव की निंदा की है।

डिप्लोमेटिक कोशिशें और आर्थिक असर

युद्ध को रोकने के लिए स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान की बैठक होनी थी, लेकिन लड़ाई बढ़ने के कारण इसे पहले टाल दिया गया। अब अमेरिका के दूत Steve Witkoff और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड जा रहे हैं।

लेबनान पहले से ही 2019 के आर्थिक संकट और 2024 के युद्ध से जूझ रहा है। अर्थव्यवस्था मंत्री Amer Bisat ने बताया कि 2023-24 के संघर्ष में लगभग 14 अरब डॉलर का नुकसान हुआ और अब पुनर्निर्माण के लिए 11 अरब डॉलर की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक हालत सुधारने के लिए सुरक्षा और राजनीतिक सुधार जरूरी हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.