इसराइल और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब एक नए मोड़ पर आ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर की बात सामने आई थी, लेकिन इसराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कर दिया है कि उनके हमले लेबनान में नहीं रुकेंगे। उनका कहना है कि उत्तरी इसराइल की सुरक्षा के लिए Hezbollah पर हमले जारी रखना जरूरी है और इस मामले में कोई समझौता नहीं होगा।

🗞️: Qatar Amir ने लेबनान के राष्ट्रपति से की फोन पर बात, इजरायली हमलों के बीच मदद और युद्धविराम पर हुई चर्चा.

सीजफायर को लेकर क्या है विवाद?

पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल 2026 को एक युद्धविराम का एलान हुआ था। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने कहा था कि यह नियम लेबनान समेत हर जगह लागू होगा। हालांकि, Netanyahu के ऑफिस ने तुरंत बयान जारी कर कहा कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने इसे एक गलतफहमी बताया है और कहा कि अमेरिका लेबनान में हमले रोकने पर कभी राजी नहीं हुआ था।

ईरान की नाराजगी और मौजूदा सैन्य कार्रवाई

ईरान ने इसराइल और अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि लेबनान में हमले जारी रहना और उनके हवाई क्षेत्र में ड्रोन का आना 10 सूत्रीय प्रस्ताव के खिलाफ है। इसी तनाव के बीच कुछ बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं।

पक्ष मुख्य अपडेट
Israel Beirut और दक्षिणी लेबनान में 100 से ज्यादा ठिकानों पर हवाई हमले किए।
Iran विरोध में Strait of Hormuz को अस्थायी रूप से बंद किया और बातचीत के बहिष्कार की धमकी दी।
Hezbollah 9 अप्रैल को उत्तरी इसराइल पर मिसाइल हमले की जिम्मेदारी ली।
US कहा कि ईरान का 10 सूत्रीय प्रस्ताव वह नहीं है जिस पर अमेरिका ने सहमति दी थी।

इसराइली सेना (IDF) ने पुष्टि की है कि लेबनान में उनके ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुए हैं और जमीनी कार्रवाई भी जारी है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ किया है कि लेबनान में शांति उनके प्लान की मुख्य शर्त थी, जिसके बिना बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल है।