मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इसराइल ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया है। 20 जुलाई 2026 तक मिली जानकारी के अनुसार, इसराइली सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि ईरान की सरकार किसी भी वक्त हमले को मंजूरी दे सकती है। इस खतरे को देखते हुए यरुशलम में सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से तैयार हैं।
इसराइल का कड़ा रुख
इसराइली डिफेंस मिनिस्टर Israel Katz ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरान ने इसराइल पर मिसाइलें दागीं, तो वे पूरी ताकत के साथ जवाबी कार्रवाई करेंगे। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी स्थिति पर चर्चा करने के लिए सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई है। इसराइल ने तीन स्थितियों की पहचान की है जिनमें वह सीधे संघर्ष में शामिल हो सकता है: ईरान का सीधा हमला, हमले की तैयारी के स्पष्ट संकेत, या फिर अमेरिका की ओर से सहायता की मांग।
अमेरिका और ईरान की स्थिति
अमेरिका ने इसराइल को सूचित किया है कि वह आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान तेज करेगा। अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए अतिरिक्त उपकरण और 10 से ज्यादा एरियल रिफ्यूलिंग विमान तैनात किए हैं। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने अमेरिका के हवाई अभियानों के बाद इसे एक ‘पूर्ण युद्ध’ करार दिया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने बताया कि उन्हें मध्यस्थों के जरिए युद्धविराम के प्रस्ताव मिले हैं, जिसमें 10 दिनों के संघर्ष विराम की बात शामिल है। इस दौरान जॉर्डन पर हुए ईरानी मिसाइल हमलों का असर इसराइल के Eilat क्षेत्र तक देखा गया है, जिसे इसराइली एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट किया।
